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सर्वकोश
महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished3,237 पृष्ठ

पृष्ठ 1427, कुल 3237 में से

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पृष्ठ 1427

‘तुमलोग विजयी होओ अथवा मारे जाओ, दोनों ही दशाओंमें उत्तम गति प्राप्त करोगे। जीतकर तो तुम प्रचुर दक्षिणाओंसे युक्त बहुसंख्यक यज्ञोंद्वारा भगवान् यज्ञपुरुषकी आराधना करो अथवा मारे जानेपर देवरूप होकर बहुत-से पुण्यलोक प्राप्त करो’॥ ६०१/३॥

ते राज्ञा चोदिता वीरा योत्स्यमाना महारथाः ॥ ६१ ॥
क्षात्रधर्मं पुरस्कृत्य त्वरिता द्रोणमभ्ययुः ।
राजा युधिष्ठिरसे इस प्रकार प्रेरित हो उन वीर महारथियोंने युद्धके लिये उद्यत होकर क्षत्रियधर्मको सामने रखते हुए बड़ी उतावलीके साथ द्रोणाचार्यपर आक्रमण किया॥ ६११/३॥

पञ्चालास्त्वेकतो द्रोणमभ्यघ्नन् निशितैः शरैः ॥ ६२ ॥
भीमसेनपुरोगाश्चाप्येकतः पर्यवारयन् ।
एक ओरसे पांचाल वीर तीखे बाणोंसे द्रोणाचार्यको मारने लगे और दूसरी ओरसे भीमसेन आदि वीरोंने उन्हें घेर रखा था॥ ६२१/३॥

आसंस्तु पाण्डुपुत्राणां त्रयो जिह्मा महारथाः ॥ ६३ ॥
यमौ च भीमसेनश्च प्राक्रोशंस्ते धनंजयम् ।
अभिद्रवार्जुन क्षिप्रं कुरून् द्रोणादपानुद ॥ ६४ ॥
पाण्डवोंके तीन महारथी कुछ कुटिल स्वभावके थे—नकुल, सहदेव और भीमसेन। इन तीनोंने अर्जुनको पुकारा—‘अर्जुन! दौड़ो, दौड़ो और शीघ्र ही द्रोणाचार्यके पाससे इन कौरवोंको भगाओ॥ ६३-६४॥

तत एनं हनिष्यन्ति पञ्चाला हतरक्षिणम् ।
कौरवेयांस्ततः पार्थः सहसा समुपाद्रवत् ॥ ६५ ॥
‘जब इनके रक्षक मारे जायँगे, तभी पांचाल वीर इन्हें मार सकेंगे।’ तब अर्जुनने सहसा कौरवयोद्धाओंपर आक्रमण किया॥ ६५॥

पञ्चालानेव तु द्रोणो धृष्टद्युम्नपुरोगमान् ।
ममर्दुस्तरसा वीराः पञ्चमेऽहनि भारत ॥ ६६ ॥
भारत! उधरसे द्रोणने धृष्टद्युम्न आदि पांचालोंपर ही धावा किया। उस पाँचवें दिनके युद्धमें वे सभी वीर वेगपूर्वक एक-दूसरेको रौंदने लगे॥ ६६॥

इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि द्रोणवधपर्वणि संकुलयुद्धे
एकोननवत्यधिकशततमोऽध्यायः ॥ १८९ ॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत द्रोणवधपर्वमें संकुलयुद्धविषयक एक सौ नवासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १८९॥