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सर्वकोश
महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished3,237 पृष्ठ

पृष्ठ 1212, कुल 3237 में से

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पृष्ठ 1212

नचोदयंस्तेऽपि चक्रुः प्रदीपान् ॥ २७ ॥
हमारी सेनाको मशालोंके प्रकाशसे प्रकाशित देख कुन्तीके पुत्रोंने भी तुरंत ही सारी सेनाके पैदल सैनिकोंको मशाल जलानेकी आज्ञा दी, अतः उन्होंने भी मशालें जला लीं ॥ २७ ॥
गजे गजे सप्त कृताः प्रदीपा
रथे रथे चैव दश प्रदीपाः ।
द्वावश्वपृष्ठे परिपार्श्वतोऽन्ये
ध्वजेषु चान्ये जघनेषु चान्ये ॥ २८ ॥
उनके एक-एक हाथीके लिये सात-सात और एक-एक रथके लिये दस-दस प्रदीपोंकी व्यवस्था की गयी। घोड़ोंके पृष्ठभागमें दो प्रदीप थे। अगल-बगलमें, ध्वजाओंके समीप तथा रथके पिछले भागोंमें अन्यान्य दीपकोंकी व्यवस्था की गयी थी ॥ २८ ॥
सेनासु सर्वासु च पार्श्वतोऽन्ये
पश्चात् पुरस्ताच्च समन्ततश्च ।
मध्ये तथान्ये ज्वलिताग्निहस्ता
व्यदीपयन् पाण्डुसुतस्य सेनाम् ॥ २९ ॥
सारी सेनाओंके पार्श्वभागमें, आगे, पीछे, बीचमें एवं चारों ओर भिन्न-भिन्न सैनिक चलती हुई मशालें हाथमें लेकर पाण्डुपुत्रकी सेनाको प्रकाशित करने लगे ॥
मध्ये तथान्ये ज्वलिताग्निहस्ताः
सेनाद्वयेऽपि स्म नरा विचेरुः ।
सर्वेषु सैन्येषु पदातिसङ्घा
विमिश्रिता हस्तिरथाश्ववृन्दैः ॥ ३० ॥
व्यदीपयंस्ते ध्वजिनीं प्रदीप्तां
तथा बलं पाण्डवेयाभिगुप्तम् ।
दोनों ही सेनाओंके अन्यान्य पैदल सैनिक हाथोंमें प्रदीप धारण किये दोनों ही सेनाओंके भीतर विचरण करने लगे। सारी सेनाओंके पैदलसमूह हाथी, रथ और अश्वसमूहोंके साथ मिलकर आपकी सेनाको तथा पाण्डवोंद्वारा सुरक्षित वाहिनीको भी अत्यन्त प्रकाशित करने लगे ॥ ३० १/२ ॥
तेन प्रदीप्तेन तथा प्रदीप्तं
बलं तवासीद् बलवद् बलेन ॥ ३१ ॥
भाः कुर्वता भानुमता ग्रहेण
दिवाकरेणाग्निरिवाभिगुप्तः ।