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सर्वकोश
महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

Mahabharata (Vol 3) - Virata, Udyoga and Bhishma Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,343 पृष्ठ

पृष्ठ 2238, कुल 2343 में से

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पृष्ठ 2238

वृष्णिवंशी महारथी सात्यकिको रथसेनासे घिरा हुआ देख दुर्योधनने अत्यन्त कुपित होकर अपने समस्त भाइयोंसे कहो— ॥ १५ ॥
तथा कुरुत कौरव्या यथा वः सात्यको युधि ।
न जीवन् प्रतिनिर्याति महतोऽस्माद् रथव्रजात् ॥ १६ ॥
‘कौरवो! तुम ऐसा प्रयत्न करो, जिससे इस समरांगणमें आये हुए सात्यकि हमारे इस महान् रथ-समुदायसे जीवित न निकलने पावें ॥ १६ ॥
तस्मिन् हते हतं मन्ये पाण्डवानां महद् बलम् ।
तथेति च वचस्तस्य परिगृह्य महारथाः ॥ १७ ॥
शैनेयं योधयामासुर्भीष्मायाभ्युद्यतं रणे ।
‘सात्यकिके मारे जानेपर मैं पाण्डवोंकी विशाल सेनाको मरी हुई ही मानता हूँ।’ दुर्योधनकी इस बातको मानकर कौरव महारथियोंने रणभूमिमें भीष्मका सामना करनेके लिये उद्यत हुए सात्यकिसे युद्ध आरम्भ किया ॥ १७ १/२ ॥
(अभिमन्युं तथाऽऽयान्तं भीष्मस्याभ्युद्यतं वधे ।)
काम्बोजराजो बलवान् वारयामास संयुगे ॥ १८ ॥
इसी प्रकार भीष्मका वध करनेके लिये उद्यत होकर आते हुए अर्जुनकुमार अभिमन्युको बलवान् काम्बोजराजने युद्धके मैदानमें आगे बढ़नेसे रोक दिया ॥ १८ ॥
आर्जुनिं नृपतिर्विद्ध्वा शरैः संनतपर्वभिः ।
पुनरेव चतुःषष्ट्या राजन् विव्याध तं नृप ॥ १९ ॥
राजन्! नरेश्वर! काम्बोजराजने झुकी हुई गाँठवाले अनेक बाणोंद्वारा अभिमन्युको घायल करके पुनः चौंसठ बाणोंसे मारकर उन्हें गहरी चोट पहुँचायी ॥ १९ ॥
सुदक्षिणस्तु समरे पुनर्विव्याध पञ्चभिः ।
सारथिं चास्य नवभिरिच्छन् भीष्मस्य जीवितम् ॥ २० ॥
तदनन्तर समरांगणमें भीष्मके जीवनकी रक्षा चाहनेवाले काम्बोजराज सुदक्षिणने अभिमन्युको पुनः पाँच बाण मारे और नौ बाणोंद्वारा उनके सारथिको भी घायल कर दिया ॥ २० ॥
तद् युद्धमासीत् सुमहत् तयोस्तत्र समागमे ।
यदाभ्यधावद् गाङ्गेयं शिखण्डी शत्रुकर्शनः ॥ २१ ॥
जब शत्रुसूदन शिखण्डीने गंगानन्दन भीष्मपर धावा किया था, उस समय उन दोनों (अभिमन्यु और सुदक्षिण)-के संघर्षमें वहाँ बड़ा भारी युद्ध आरम्भ हो गया ॥ २१ ॥
विराटद्रुपदौ वृद्धौ वारयन्तौ महाचमूम् ।
भीष्मं च युधि संरब्धावादद्रवन्तौ महारथौ ॥ २२ ॥
बूढ़े राजा महारथी विराट और द्रुपद दुर्योधनकी उस विशाल सेनाको रोकते हुए अत्यन्त क्रोधमें भरकर युद्धस्थलमें भीष्मपर चढ़ आये ॥ २२ ॥