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सर्वकोश
महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

Mahabharata (Vol 3) - Virata, Udyoga and Bhishma Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,343 पृष्ठ

पृष्ठ 1789, कुल 2343 में से

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पृष्ठ 1789

परम दुर्जय शूर सैनिक विपक्षीको मार डालनेकी अभिलाषा लेकर अपने और परायेको भी जान नहीं पाते थे। बहुधा अपने ही पक्षके सैनिक अपने ही योद्धाओंको मारनेके लिये पकड़ लेते थे ॥ १३ ½ ॥
विमर्दः सुमहानासीदल्पानां बहुभिः सह ॥ १४ ॥
कलिङ्गैः सह चेदीनां निषादैश्च विशाम्पते ।
राजन्! इस प्रकार वहाँ बहुसंख्यक कलिंगों और निषादोंके साथ अल्पसंख्यक चेदिदेशीय सैनिकोंका बड़ा भयंकर युद्ध होने लगा ॥ १४ ½ ॥
कृत्वा पुरुषकारं तु यथाशक्ति महाबलाः ॥ १५ ॥
भीमसेनं परित्यज्य संन्यवर्तन्त चेदयः ।
महाबली चेदि सैनिक यथाशक्ति पुरुषार्थ प्रकट करके भीमसेनको छोड़कर भाग चले ॥ १५ ½ ॥
सर्वैः कलिङ्गैरासन्नः संनिवृत्तेषु चेदिषु ॥ १६ ॥
स्वबाहुबलमास्थाय न न्यवर्तत पाण्डवः ।
न चचाल रथोपस्थाद् भीमसेनो महाबलः ॥ १७ ॥
चेदिदेशीय सैनिकोंके पलायन कर जानेपर समस्त कलिंग भीमसेनके निकट जा पहुँचे; तो भी महाबली पाण्डुनन्दन भीमसेन अपने बाहुबलका भरोसा करके पीछे नहीं हटे और न रथकी बैठकसे तनिक भी विचलित हुए ॥ १६-१७ ॥
शितैर्वाकिरद् बाणैः कलिङ्गानां वरूथिनीम् ।
कालिङ्गस्तु महेष्वासः पुत्रश्चास्य महारथः ॥ १८ ॥
शक्रदेव इति ख्यातो जघ्नतुः पाण्डवं शरैः ।
वे कलिंगोंकी सेनापर अपने तीखे बाणोंकी वर्षा करने लगे। महाधनुर्धर कलिंगराज और उसका महारथी पुत्र शक्रदेव दोनों मिलकर पाण्डुनन्दन भीमसेनपर बाणोंका प्रहार करने लगे ॥ १८ ½ ॥
ततो भीमो महाबाहुर्विधुन्वन् रुचिरं धनुः ॥ १९ ॥
योधयामास कालिङ्गं स्वबाहुबलमाश्रितः ।
तब महाबाहु भीमने अपने बाहुबलका आश्रय लेकर सुन्दर धनुषकी टंकार फैलाते हुए कलिंगराजसे युद्ध आरम्भ किया ॥ १९ ½ ॥
शक्रदेवस्तु समरे विसृजन् सायकान् बहून् ॥ २० ॥
अश्वाञ्जघान समरे भीमसेनस्य सायकैः ।
शक्रदेवने समरभूमिमें बहुत-से सायकोंकी वर्षा करते हुए उन सायकोंद्वारा भीमसेनके घोड़ोंको मार डाला ॥ २० ½ ॥
तं दृष्ट्वा विरथं तत्र भीमसेनमरिंदमम् ॥ २१ ॥
शक्रदेवोऽभिदुद्राव शरैरवकिरन् शितैः ।