सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

Mahabharata (Vol 3) - Virata, Udyoga and Bhishma Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,343 पृष्ठ

पृष्ठ 171, कुल 2343 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 171

था और स्वयं सकुशल लौट आये थे। क्या कौरव कभी उनकी याद करते हैं? ।। २७ ।।
न कर्मणा साधुनैकेन नूनं
सुखं शक्यं वै भवतीह संजय ।
सर्वात्मना परिजेतं वयं चे-
न्न शक्नुमो धृतराष्ट्रस्य पुत्रम् ।। २८ ।।
संजय! यदि हम धृतराष्ट्रपुत्र दुर्योधनको सभी उपायोंसे नहीं जीत सकते तो केवल एक अच्छे व्यवहारसे ही उसे सुखपूर्वक जीतना हमारे लिये निश्चय ही सम्भव नहीं है ।। २८ ।।
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि सञ्जययानपर्वणि युधिष्ठिरप्रश्ने त्रयोविंशोऽध्यायः ।। २३ ।।
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत संजययानपर्वमें युधिष्ठिरप्रश्नविषयक तेईसवाँ अध्याय पूरा हुआ ।। २३ ।।