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सर्वकोश
महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

Mahabharata (Vol 3) - Virata, Udyoga and Bhishma Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,343 पृष्ठ

पृष्ठ 1054, कुल 2343 में से

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पृष्ठ 1054

‘सुयोधन! तुझे समस्त भाइयोंसहित मारकर धर्मराज युधिष्ठिरके देखते-देखते तेरे मस्तकको पैरसे कुचल दूँगा’ ।। ३६ ।।
नकुलस्तु ततो वाक्यमिदमाह महीपते ।
उलूक ब्रूहि कौरव्यं धार्तराष्ट्रं सुयोधनम् ।। ३७ ।।
श्रुतं ते गदतो वाक्यं सर्वमेव यथातथम् ।
तथा कर्तास्मि कौरव्य यथा त्वमनुशास्सि माम् ।। ३८ ।।
जनमेजय! तत्पश्चात् नकुलने भी इस प्रकार कहा—‘उलूक! तू कुरुकुलकलंक धृतराष्ट्रपुत्र दुर्योधन-से कहना, तेरी कही हुई सारी बातें मैंने यथार्थरूपसे सुन लीं। कौरव! तू मुझे जैसा उपदेश दे रहा है, उसके अनुसार ही मैं सब कुछ करूँगा’ ।। ३७-३८ ।।
सहदेवोऽपि नृपते इदमाह वचोऽर्थवत् ।
सुयोधन मतिर्या ते वृथैषा ते भविष्यति ।। ३९ ।।
शोचिष्यसे महाराज सपुत्रज्ञातिबान्धवः ।
इमं च क्लेशमस्माकं हृष्टो यत् त्वं विकत्थसे ।। ४० ।।
राजन्! तदनन्तर सहदेवने भी यह सार्थक वचन कहा—‘महाराज दुर्योधन! आज जो तेरी बुद्धि है, वह व्यर्थ हो जायगी। इस समय हमारे इस महान् क्लेशका जो तू हर्षोत्फुल्ल होकर वर्णन कर रहा है, इसका फल यह होगा कि तू अपने पुत्र, कुटुम्बी तथा बन्धुजनोंसहित शोकमें डूब जायगा’ ।। ३९-४० ।।
विराटद्रुपदौ वृद्धावुलूकमिदमूचतुः ।
दासभावं नियच्छेव साधोरिति मतिः सदा ।
तौ च दासावदासौ वा पौरुषं यस्य यादृशम् ।। ४१ ।।
तदनन्तर बूढ़े राजा विराट और द्रुपदने उलूकसे इस प्रकार कहा—‘उलूक! तू दुर्योधनसे कहना, राजन्! हम दोनोंका विचार सदा यही रहता है कि हम साधु पुरुषोंके दास हो जायँ। वे दोनों हम विराट और द्रुपद दास हैं या अदास; इसका निर्णय युद्धमें जिसका जैसा पुरुषार्थ होगा, उसे देखकर किया जायगा’ ।। ४१ ।।
शिखण्डी तु ततो वाक्यमुलूकमिदमब्रवीत् ।
वक्तव्यो भवता राजा पापेष्वभिरतः सदा ।। ४२ ।।
तत्पश्चात् शिखण्डीने उलूकसे इस प्रकार कहा—‘उलूक! सदा पापमें ही तत्पर रहनेवाले अपने राजाके पास जाकर तू इस प्रकार कहना— ।। ४२ ।।
पश्य त्वं मां रणे राजन् कुर्वाणं कर्म दारुणम् ।
यस्य वीर्यं समासाद्य मन्यसे विजयं युधि ।। ४३ ।।
तमहं पातयिष्यामि रथात् तव पितामहम् ।
‘राजन्! तुम संग्राममें मुझे भयानक कर्म करते हुए देखना। जिसके पराक्रमका भरोसा करके तुम युद्धमें अपनी विजय हुई मानते हो, तुम्हारे उस पितामहको मैं रथसे मार