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सर्वकोश
महाभारत (खंड २) - वन पर्व

महाभारत (खंड २) - वन पर्व

Mahabharata (Vol 2) - Vana Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,580 पृष्ठ

पृष्ठ 24, कुल 2580 में से

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पृष्ठ 24

४२- उत्तरका बृहन्नलासे पाण्डवोंके अस्त्र-शस्त्रोंके विषयमें प्रश्न करना
४३- बृहन्नलाद्वारा उत्तरको पाण्डवोंके आयुधोंका परिचय कराना
४४- अर्जुनका उत्तरकुमारसे अपना और अपने भाइयोंका यथार्थ परिचय देना
४५- अर्जुनद्वारा युद्धकी तैयारी, अस्त्र-शस्त्रोंका स्मरण, उनसे वार्तालाप तथा उत्तरके भयका निवारण
४६- उत्तरके रथपर अर्जुनको ध्वजकी प्राप्ति, अर्जुनका शंखनाद और द्रोणाचार्यका कौरवोंसे उत्पातसूचक अपशकुनोंका वर्णन
४७- दुर्योधनके द्वारा युद्धका निश्चय तथा कर्णकी उक्ति
४८- कर्णकी आत्मप्रशंसापूर्ण अहंकारोक्ति
४९- कृपाचार्यका कर्णको फटकारते हुए युद्धके विषयमें अपना विचार बताना
५०- अश्वत्थामाके उद्गार
५१- भीष्मजीके द्वारा सेनामें शान्ति और एकता बनाये रखनेकी चेष्टा तथा द्रोणाचार्यके द्वारा दुर्योधनकी रक्षाके लिये प्रयत्न
५२- पितामह भीष्मकी सम्मति
५३- अर्जुनका दुर्योधनकी सेनापर आक्रमण करके गौओंको लौटा लेना
५४- अर्जुनका कर्णपर आक्रमण, विकर्णकी पराजय, शत्रुंतप और संग्रामजित्का वध, कर्ण और अर्जुनका युद्ध तथा कर्णका पलायन
५५- अर्जुनद्वारा कौरवसेनाका संहार और उत्तरका उनके रथको कृपाचार्यके पास ले जाना
५६- अर्जुन और कृपाचार्यका युद्ध देखनेके लिये देवताओंका आकाशमें विमानोंपर आगमन
५७- कृपाचार्य और अर्जुनका युद्ध तथा कौरवपक्षके सैनिकोंद्वारा कृपाचार्यको हटा ले जाना
५८- अर्जुनका द्रोणाचार्यके साथ युद्ध और आचार्यका पलायन
५९- अश्वत्थामाके साथ अर्जुनका युद्ध
६०- अर्जुन और कर्णका संवाद तथा कर्णका अर्जुनसे हारकर भागना
६१- अर्जुनका उत्तरकुमारको आस्वासन तथा अर्जुनसे दुःशासन आदिकी पराजय
६२- अर्जुनका सब योद्धाओं और महारथियोंके साथ युद्ध
६३- अर्जुनपर समस्त कौरवपक्षीय महारथियोंका आक्रमण और सबका युद्धभूमिसे पीठ दिखाकर भागना
६४- अर्जुन और भीष्मका अद्भुत युद्ध तथा मूर्छित भीष्मका सारथिद्वारा रणभूमिसे हटाया जाना