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सर्वकोश
महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व

महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व

Mahabharata (Vol 1) - Adi and Sabha Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,256 पृष्ठ

पृष्ठ 262, कुल 2256 में से

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पृष्ठ 262

भिन्नानामतुलो नाशः क्षिप्रमेव प्रवर्तते ॥ २० ॥
‘दूसरे लोग, उनमें फूट हो गयी है, यह जानकर उनके छिद्र देखा करते हैं एवं छिद्र मिल जानेपर उनमें परस्पर वैर बढ़ानेके लिये स्वयं बीचमें आ पड़ते हैं। इसलिये जो लोग अलग-अलग होकर आपसमें फूट पैदा कर लेते हैं, उनका शीघ्र ही ऐसा विनाश हो जाता है, जिसकी कहीं तुलना नहीं है’ ॥ २० ॥

तस्माद् विभागं भ्रातॄणां न प्रशंसन्ति साधवः ।
गुरुशास्त्रे निबद्धानामन्योन्येनाभिशङ्किनाम् ॥ २१ ॥
‘अतः साधु पुरुष भाइयोंके बिलगाव या बँटवारेकी प्रशंसा नहीं करते; क्योंकि इस प्रकार बँट जानेवाले भाई गुरुस्वरूप शास्त्रकी अलंघनीय आज्ञाके अधीन नहीं रह जाते और एक-दूसरेको संदेहकी दृष्टिसे देखने लगते हैं’ ॥ २१ ॥*

नियन्तुं न हि शक्यस्त्वं भेदतो धनमिच्छसि ।
यस्मात् तस्मात् सुप्रतीक हस्तित्वं समवाप्स्यसि ॥ २२ ॥
‘सुप्रतीक! तुम्हें वशमें करना असम्भव हो रहा है और तुम भेदभावके कारण ही बँटवारा करके धन लेना चाहते हो, इसलिये तुम्हें हाथीकी योनिमें जन्म लेना पड़ेगा’ ॥ २२ ॥

शप्तस्त्वेवं सुप्रतीको विभावसुमथाब्रवीत् ।
त्वमप्यन्तर्जलचरः कच्छपः सम्भविष्यसि ॥ २३ ॥
इस प्रकार शाप मिलनेपर सुप्रतीकने विभावसुसे कहा—‘तुम भी पानीके भीतर विचरनेवाले कछुए होओगे’ ॥ २३ ॥

एवमन्योन्यशापात् तौ सुप्रतीकविभावसू ।
गजकच्छपतां प्राप्तावर्थार्थं मूढचेतसौ ॥ २४ ॥
इस प्रकार सुप्रतीक और विभावसु मुनि एक-दूसरेके शापसे हाथी और कछुएकी योनिमें पड़े हैं। धनके लिये उनके मनमें मोह छा गया था ॥ २४ ॥

रोषदोषानुषङ्गेण तिर्यग्योनिगतावुभौ ।
परस्परद्वेषरतौ प्रमाणबलदर्पितौ ॥ २५ ॥
सरस्यस्मिन् महाकायौ पूर्ववैरानुसारिणौ ।
तयोरन्यतरः श्रीमान् समुपैति महागजः ॥ २६ ॥
यस्य बृंहितशब्देन कूर्मोऽप्यन्तर्जलेशयः ।
उत्थितोऽसौ महाकायः कृत्स्नं विक्षोभयन् सरः ॥ २७ ॥
रोष और लोभरूपी दोषके सम्बन्धसे उन दोनोंको तिर्यक्-योनिमें जाना पड़ा है। वे दोनों विशालकाय जन्तु पूर्व जन्मके वैरका अनुसरण करके अपनी विशालता और बलके घमण्डमें चूर हो एक-दूसरेसे द्वेष रखते हुए इस सरोवरमें रहते हैं। इन दोनोंमें एक जो सुन्दर महान् गजराज है, वह जब सरोवरके तटपर आता है, तब उसके चिग्घाड़नेकी आवाज