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सर्वकोश
महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व

महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व

Mahabharata (Vol 1) - Adi and Sabha Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,256 पृष्ठ

पृष्ठ 1931, कुल 2256 में से

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पृष्ठ 1931

गदं सारणमक्रूरं कृतवर्माणमेव च ।
चारुदेष्णं सुदेष्णं च अन्यानपि यथोचितम् ।।
परिष्वज्य च दृष्ट्वा च भगवान् भूतभावनः ।
भूतभावन ऐश्वर्यशाली इन्द्रने वसुदेव, उद्धव, महामति विकद्रु, प्रद्युम्न, साम्ब, निशठ, अनिरुद्ध, सात्यकि, गद, सारण, अक्रूर, कृतवर्मा, चारुदेष्ण तथा सुदेष्ण आदि अन्य यादवोंका भी यथोचित रीतिसे आलिंगन करके उन सबकी ओर दृष्टिपात किया।
वृष्ण्यन्धकमहामात्रान् परिष्वज्याथ वासवः ।।
प्रगृह्य पूजां तैर्दत्तामुवाचावनताननः ।
इस प्रकार उन्होंने वृष्णि और अन्धकवंशके प्रधान व्यक्तियोंको हृदयसे लगाकर उनकी दी हुई पूजा ग्रहण की तथा मुखको नीचेकी ओर झुकाकर वे इस प्रकार बोले—

इन्द्र उवाच

अदित्या चोदितः कृष्ण तव मात्राहामागतः ।।
कुण्डलेऽपहृते तात भौमेन नरकेण च ।
इन्द्रने कहा—भैया कृष्ण! तुम्हारी माता अदितिकी आज्ञासे मैं यहाँ आया हूँ। तात! भूमिपुत्र नरकासुरने उनके कुण्डल छीन लिये हैं।
निदेशशब्दवाच्यस्त्वं लोकेऽस्मिन् मधुसूदन ।।
तस्माज्जहि महाभाग भूमिपुत्रं नरेश्वर ।
मधुसूदन! इस लोकमें माताका आदेश सुननेके पात्र केवल तुम्हीं हो। अतः महाभाग नरेश्वर! तुम भौमासुरको मार डालो।

भीष्म उवाच

तमुवाच महाबाहुः प्रीयमाणो जनार्दनः ।
निर्जित्य नरकं भौममाहरिष्यामि कुण्डले ।।
भीष्मजी कहते हैं—युधिष्ठिर! तब महाबाहु जनार्दन अत्यन्त प्रसन्न होकर बोले—'देवराज! मैं भूमिपुत्र नरकासुरको पराजित करके माताजीके कुण्डल अवश्य ला दूँगा'।
एवमुक्त्वा तु गोविन्दो राममेवाभ्यभाषत ।
प्रद्युम्नमनिरुद्धं च साम्बं चाप्रतिमं बले ।।
एतांश्चोक्त्वा तदा तत्र वासुदेवो महायशाः ।
अथारुह्य सुपर्णं वै शङ्खचक्रगदासिधृक् ।।
ययौ तदा हृषीकेशो देवानां हितकाम्यया ।
ऐसा कहकर भगवान् गोविन्दने बलरामजीसे बातचीत की। तत्पश्चात् प्रद्युम्न, अनिरुद्ध और अनुपम बलवान् साम्बसे भी इसके विषयमें वार्तालाप करके महायशस्वी इन्द्रियाधीश्वर