माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)
Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation
माधवकर द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें(७८) माधवनिदान ।
पित्तजपांडुरोगीके लक्षण ।
पीतमूत्रशकृन्नेत्रो दाहतृष्णाज्वरान्वितः ।
भिन्नविट्कोऽतिपीताभः पित्तपाण्डामयी नरः ॥ ५ ॥
पित्तपांडुरोगीके ये लक्षण होते हैं—मल मूत्र और नेत्र पीले हों, दाह, प्यास,
ज्वर इनसे पीडित हो, मल पतला हो और उस रोगीके देहकी कांति अत्यन्त
पीली होती है ॥
कफपांडुरोगीके लक्षण ।
कफप्रसेकश्वयथुतन्द्रालस्यातिगौरवैः ।
पाण्डुरोगः कफाच्छुक्लैस्त्वङ्मूत्रनयनाननैः ॥ ६ ॥
मुखसे कफका गिरना, सूजन, तन्द्रा, आलसक शरीरका भारी होना, त्वचा,
मूत्र, नेत्र, मुख इनका सफेद होना इन लक्षणोंसे कफका पांडुरोग जानना ॥
सन्निपातयुक्त पांडुरोगके असाध्य लक्षण ।
ज्वरारोचकहृल्लासच्छर्दितृष्णाक्लमान्वितः ।
पाण्डुरोगी त्रिभिर्दोषैस्त्याज्यः क्षीणो हतेन्द्रियः ॥ ७ ॥
ज्वर, अरुचि, ओकारी ( उबकाई ), वमन, प्यास और क्लम इतने उपद्रवयुक्त
जो त्रिदोषजन्य पांडुरोगी क्षीण होगया हो और जिसकी इंद्रियें अपना अपना विषय
ग्रहण करनेकी शक्ति न रखती हों तो उसको वैद्य त्याग दे ॥
मिट्टीखानेसे प्रगट पांडुरोगकी सम्प्राप्ति ।
मृत्तिकादनशीलस्य कुप्यत्यन्यतमो मलः । कषाया मारुतं
पित्तमूपरा मधुरा कफम् ॥८॥ कोपयेन्मृद्रसादींश्च रौक्ष्याद्
भुक्तं च रूक्षयेत् । पूरयत्यविपक्कैव स्रोतांसि निरुणद्ध्यपि
॥ ९ ॥ इन्द्रियाणां बलं हत्वा तेजो वीर्यौजसी तथा। पाण्डु-
रोगं करोत्याशु बलवर्णाग्निनाशनम् ॥ १० ॥
१ चरकमें लिखा है—सर्वान्नसेविनः सर्वे दुष्टा दोषास्त्रिदोषजम् । त्रिलिंगं संप्रकुर्वन्ति
पांडुरोगं सुदुःसहम् ॥ सम्पूर्ण अन्नोंके सेवन करनेवाले पुरुषके तीनों दोष दुष्ट हुए त्रिदोषज
पांडुरोगको करते हैं जिसमें तीनों दोषोंके लक्षण मिलते हैं उसको सन्निपातका पांडुरोग
जानना और वह असाध्य है ॥
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