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सर्वकोश
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

माधवकर द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ

पृष्ठ 88, कुल 404 में से

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पृष्ठ 88

( ७० ) माधवनिदान ।
लघु और स्निग्ध गरम आदिगुणयुक्त भी हितकारी पदार्थ खाय तो भी अन्न अच्छी
रीतिसे नहीं पचे ये देहके कारण कहे । अब अजीर्णके कारण जो मनसे सम्बन्ध
रखते हैं उनको कहते हैं-ईर्ष्या कहिये परद्रव्यको न देख सकना, डरना, क्रोध
करना इन कारणोंसे युक्त तथा लोभ, शोक, दीनतासे पीडित और मत्सरता करना
इन कारणोंसे मनुष्यके भोजन करा हुआ अन्न भले प्रकार पचता नहीं है ॥
आमादिक अजीर्णोंके लक्षण ।
तत्राामे गुरुतोत्क्लेशः शोथो गण्डाक्षिकूटगः ।
उद्गारश्च यथाभुक्तमविदग्धः प्रवर्त्तते ॥ ६ ॥
उन चारों अजीर्णोंमें प्रथम आमाजीर्णके लक्षण कहते हैं-पेट और अंग भारी
हो, वमनके आनेकेसे प्रतीत हो, कपोल और नेत्रोंमें सूजन होवै और इसी अजी-
र्णके प्रभावसे जैसा भोजन करा होय मीठा आदि उसी प्रकारकी डकार आवे ॥
विदग्धाजीर्णके लक्षण ।
विदग्धे भ्रमतृण्मूर्च्छाः पित्ताच्च विविधा रुजः ।
उद्गारश्च सधूमाम्लः स्वेदो दाहश्च जायते ॥ ७ ॥
विदग्ध अजीर्णमें भ्रम, प्यास और मूर्च्छा ये लक्षण होते हैं और पित्तके अनेक
रोग प्रगट हों तथा धुएँके साथ खट्टी डकार आवे पसीना आवे और दाह होय ॥
विष्टब्ध अजीर्णके लक्षण ।
विष्टब्धे शूलमाध्मानं विविधा वातवेदनाः ।
मलवाताप्रवृत्तिश्च स्तम्भो मोहोऽङ्गपीडनम् ॥ ८ ॥
विष्टब्ध अजीर्णके ये लक्षण हैं-शूल, अफरा, अनेक वातकी पीडा, मल और
अधोवायुका रुकजाना, देह जकडजाय, मोह और देहमें पीडा होय ॥
रसशेष अजीर्णके लक्षण ।
रसशेषेऽन्नविद्वेषो हृदयाशुद्धिगौरवे ।
रसशेष अजीर्णके ये लक्षण हैं-अन्नमें अरुचि, हृदयमें शुद्धि न होय और देह
भारी होय ॥
अजीर्णके उपद्रव ।
मूर्च्छा प्रलापो वमथुः प्रसेकः सदनं भ्रमः ।
उपद्रवा भवन्त्येते मरणं चाप्यजीर्णतः ॥ ९ ॥