माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)
Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation
माधवकर द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 69, कुल 404 में से
संदर्भ में पढ़ेंभाषाटीकासमेत । ( ५१ )
गन्धयुक्त बुरी दुर्गन्धके समान, प्यास, दाह, अरुचि, श्वास, हिचकी, पसवाडोंके
हाडोंमें पीडा, मनको मोह और इंद्रियोंको मोह, अरति ये लक्षण होयँ तथा गुदाके
आंटोंका पकना अनर्थ भाषण करे ऐसे अतिसारी रोगीको वैद्य छोडदे ॥
दूसरे असाध्य लक्षण ।
असंवृतगुदं क्षीणं दुराध्मानमुपद्रुतम् ।
गुदे पक्के गतोष्माणमतिसारिणमुत्सृजेत् ॥ १८ ॥
जिसकी गुदाका दस्तके पिछाडी संकोच न होवे, क्षीण पुरुष, अत्यन्त अफरा-
युक्त अथवा “ दुरात्मानं ” ऐसा भी पाठान्तर है अर्थात् जिसकी इंद्रिय वश न
होवे तथा अतिसारके शोथादिक उपद्रव करके युक्त और गुदाके स्थानमें पाककर्त्ता
पकानेवाला पित्त विद्यमान होते हुए जिसकी देहमें गरमीसी नहीं दीखे अर्थात् देह
शीतल हो अथवा जिसकी अग्नि नष्ट होजावे ऐसे अतिसारी रोगीको वैद्य त्याग देवे॥
अतिसारके उपद्रव ।
शोथं शूलं ज्वरं तृष्णां श्वासकासमरोचकम् ।
छर्दिं मूर्च्छां च हिक्कां च दृष्ट्वाऽतीसारिणं त्यजेत् ॥ १९ ॥
सूजन, शूल, ज्वर, तृषा, श्वास, खांसी, अरुचि, वमन, मूर्च्छा, हिचकी ऐसे
लक्षण जिस रोगीमें होयँ उसको वैद्य छोड दे ॥
असाध्य लक्षण ।
श्वासशूलपिपासार्त्तं क्षीणं ज्वरनिपीडितम् ।
विशेषेण नरं वृद्धमतिसारो विनाशयेत् ॥ २० ॥
श्वास, शूल, प्यास इनसे पीडित, क्षीण, ज्वरसे पीडित और वृद्ध मनुष्यके ये
लक्षण होयँ तो यह अतिसाररोग मनुष्यको विनाश करे ॥
रक्तातिसारके लक्षण ।
पित्तकृन्ति यदात्यर्थं द्रव्याण्यश्नाति पैत्तिके ।
तदोपजायतेऽभीक्ष्णं रक्तातीसार उल्बणः ॥ २१ ॥
पित्तातिसारवाला पुरुष अथवा पित्तातिसार होनेवाला पुरुष जब पित्त करने-
वाली वस्तु अधिक और निरन्तर भोजन करे तब भयंकर रक्तातिसार प्रगट होता
है । इसके लाल काले पीले आदि रंग वातादि दोषोंके दूषित होनेसे होते हैं, ये भी
पित्तातिसारके भेद हैं ॥