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सर्वकोश
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

माधवकर द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ

पृष्ठ 66, कुल 404 में से

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पृष्ठ 66

( ४८ ) माधवनिदान ।

हो पवनका प्रेरित गुदाके मार्गसे बारंबार नीचेको बहुत उतरे तिसको अतिसार
कहते हैं । यह भयंकर अतिसार रोग ६ प्रकारका है-वातका १, पित्तका २, कफका ३,
४ सन्निपातका, ५ शोकका और ६ आमातिसार ऐसे छःप्रकारका अतिसार है ।
द्वंद्वज अतिसार व्याधिस्वभावकरके नहीं होते, चरकमें आमातिसार नहीं कहा । भय
और शोकसे दो कहकर संख्या पूरी करी है। और आमातिसारको सन्निपाताति-
सारके अन्तर्गत कहा है ॥ यहां माधवाचार्यने भयातिसारकी वातज अतिसारमें
गणना करी है ॥
अतिसारके पूर्वरूप ।
हृन्नाभिपा यूदरकुक्षितोदगात्रावसादानिलसन्निरोधाः ।
विट्सङ्ग आध्मानमथाविपाको भविष्यतस्तस्य पुरःसराणि॥५॥
हृदय, नाभि, गुदा, पेट, कूख इनमें पीडा हो, शरीरमें फूटनी हो, गुदाका
पवन रुकजाय, मलका अवरोध हो अफरा हो और अन्न पचे नहीं ये लक्षण-
अतिसाररोग के पूर्वरूपके होते हैं ॥
वातातिसारके लक्षण ।
अरुणं फेनिलं रूक्षमल्पमल्पं मुहुर्मुहुः ।
शकृदामं सरुक्शब्दं मारुतेनातिसार्यते ॥ ६ ॥
कुछ ललाईको लिये, झाग मिला तथा रूखा, थोडा थोडा बारम्बार आम
मिला हुआ दस्त उतरे और शूल चले तथा मल उतरते समय शब्द होवे तो वाता-
तिसार जानना ॥
पित्तातिसारके लक्षण ।
पित्तात्पीतं नीलमालोहितं वा तृष्णामूर्च्छादाहपाकोपपन्नम् ।
पित्तसे पीला काला और धूसरे रंगका मल उतरता है तथा तृष्णा मूर्च्छा और
सम्पूर्ण शरीर तथा गुदामें दाह होती है, गुदा प चजाती है ये लक्षण पित्तातिसारके हैं ॥
कफातिसारके लक्षण ।
शुक्लं सांद्रं सकफं श्लेष्मयुक्तं विस्रं शीतं हृष्टरोमा मनुष्यः ॥ ७ ॥
कफातिसारवाले पुरुषका मल सफेद, गाढा, चिकना, कफमिश्रित, दुर्गंधयुक्त
और शीतल उतरता है तथा रोम खडे होजाते हैं ये लक्षण कफातिसारके जानने ॥
सन्निपातातिसारके लक्षण ।
वराहस्नेहमांसाम्बुसदृशं सर्वरूपिणम् ।
कृच्छ्रसाध्यमतीसारं विद्याद्दोषत्रयोद्भवम् ॥ ८ ॥