माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)
Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation
माधवकर द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें( २८ ) माधवनिदान ।
मृत्युना सह योद्धव्यं सन्निपातं चिकित्सता ।
यस्तु तत्र भवेज्जेता स जेताऽऽमयसंकुले ॥ ११ ॥
जो वैद्य सन्निपातकी चिकित्सा करे है वह मौतके साथ संग्राम करे है, जो इस
सन्निपातको जीते अर्थात् शांत करे वह सर्व रोगके गणोंका जीतनेवाला है ॥
सन्निपातार्णवे मग्नं योऽभ्युद्धरति मानवम् ।
कस्तेन न कृतो धर्मः कां च पूजां न सोऽर्हति ॥ १२ ॥
जो वैद्य सन्निपातरूपी सागरमें डूबे मनुष्यको निकालता है उसने कौनसा धर्म
न करा अर्थात् सब धर्म कर चुका और वह कौन पूजाके योग्य नहीं है अर्थात् वह
सब पूजाओंके योग्य है ॥
संधिकादि त्रयोदश संनिपातोंके पृथक्पृथक् लक्षण।
१ संधिक ।
पूर्वरूपकृतशूलसम्भवं शोषवातबहुवेदनान्वितम् ।
श्लेष्मतापबलहानिजागरं सन्निपातामिति सन्धिकं वदेत् ॥ १ ॥
जिसके पूर्वरूपमें शूल, शोष, वातसे बहुत पीडा, कफका गिरना, सन्ताप, बल-
हानि, रात्रिमें जागरण ये लक्षण होयँ तिसको (संधिक) सन्निपात कहते हैं ॥
२ अन्तक ।
दाहं करोति परितापनमातनोति मोहं ददाति विदधाति
शिरःप्रकम्पम् । हिक्कां करोति कसनं च समाज़ुहोति
जानीहि तं विबुधवर्जितमन्तकाख्यम् ॥ २ ॥
दाह करे, संतापको बढावे, मोहको देवे, शिर कंपावे, हिचकी करे और खांसीको
बढावे, ऐसा पंडितोंकरके त्याज्य (अन्तक) सन्निपात जानना ॥
३ रुग्दाह ।
प्रलापपरितापनप्रबलमोहमान्द्यश्रमः परिश्रमरणवेदनाव्यथित-
कण्ठमन्याहनुः । निरन्तरतृषाकरश्वसनकासहिक्काकुलः स कष्ट-
तरसाधनो भवति हन्त रुग्दाहकः ॥ ३ ॥
अनर्थभाषण, सन्ताप, अतिमोह, मंदता, अनायास श्रम और पीडा, कंठ, मन्या
नाडी और ठोडी इनमें व्यथा, निरन्तर प्यास लगे, श्वास, खांसी और हिचकी इन
लक्षणोंकरके युक्त ऐसा यह (रुग्दाहनामक) सन्निपात कष्टसाध्य है ॥