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सर्वकोश
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

माधवकर द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ

पृष्ठ 4, कुल 404 में से

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पृष्ठ 4

प्रस्तावना.
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भरतखंडमें वैद्यशास्त्रमें रोगके निदान, वैद्य, रोगी, औषध इत्यादिकोंका वर्णन,
आचार, गुणागुण जिनमें वर्णन किये ऐसे सूत्रस्थान, चिकित्सा, शारीरक इत्यादिकों-
का विस्तारसे अच्छे तरहका विचार जिनमें किया ऐसे बहुत ग्रंथ एकएक विषयक-
रके प्रसिद्ध हैं तैसे निदानोंमें और रुग्विनिश्चय जिसको “माधवनिदान” कहते हैं
वोही प्रसिद्ध है. जैसे-
“निदाने माधवः प्रोक्तः सूत्रस्थाने तु वाग्भटः ।
शारीरे सुश्रुतः प्रोक्तश्चरकस्तु चिकित्सिते” ॥
सब निदानग्रंथोंमें “माधवनिदान” श्रेष्ठ है, सूत्रस्थानमें 'वाग्भट' अच्छा, शारीर-
स्थानमें 'सुश्रुत' उत्तम और चिकित्सा नाम औषधविचारमें 'चरक' बहुत अच्छा है ।
इस ग्रंथका कर्त्ता ग्रंथनामसेही माधव मालूम पडता है । पंडितमाधवके सब शास्त्रोंमें
ग्रंथ हैं. इस ग्रंथकी भाषा काशीआदि नगरोंमें भई है, परंतु ऐसी कहींभी नहीं. इस
टीकामें सब शब्द प्रसिद्ध बालकोंकेभी समझमें जल्दी आजायँ ऐसे हैं और इसमें
“मधुकोश, आतङ्कदर्पण” इत्यादि टीकाके आशयकीभी पंक्तिकी भाषा बनाई और
शंकासमाधान लिखा है और बहुतसे निदान जो आजतक किसी टीकाकारने नहीं
लिखे सो प्रसंगवशसे इसमें लिखदीनेहैं-जैसे चरकके मतसे क्लीबका निदान इत्यादि.
और अँग्रेजी मतसे हकीमके मतसे जो निदान हैं वेभी लिखे हैं और परिशिष्टमेंभी
शुक्र, आर्तव, गर्भ, स्नायु इत्यादि निदानका अन्य ग्रंथोंसे प्रमाण लेके इसकी भाषा
बनाई है.
इस भाषाके बनानेवाले प्रसिद्ध आयुर्वेदोद्धारक माथुरपंडित दत्तरामजी हैं इन्होंने
भाषाकरके दो आवृत्तियें दिल्लीमें और मथुरामें छपायीथीं अब इनसे कृपापूर्वक सब हक
लेके यहाँ उक्त पंडितसेही शुद्ध कराके और बढाके हमने छापी सो इस ग्रंथकूं इस
प्रतिसे और दिल्ली और मथुरामें छपे पुस्तकसेभी कोई छापनेका अधिकारी नहीं है.
इति प्रार्थना.
भवदीयशुभाकांक्षी-
खेमराज श्रीकृष्णदास,
“श्रीवेङ्कटेश्वर” स्टीम् यन्त्रालयाध्यक्ष-बंबई.