माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)
Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation
माधवकर द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 367, कुल 404 में से
संदर्भ में पढ़ेंभाषाटीकासमेत । ( ३४९ )
अथ बालरोगनिदानम् ।
━०००१५००━
त्रिविधः कथितो बालः क्षीरान्नोभयवर्तनः ।
स्वास्थ्यं ताभ्यामदुष्टाभ्यां दुष्टाभ्यां रोगसंभवः ॥ १ ॥
दूध पीनेवाला और अन्न खानेवाला और दूध अन्न दोनों खानेवाला ऐसे तीन
प्रकारके बालक होते हैं, यदि वह अन्न और दूध दुष्ट न होयँ तो बालक निरोग रहे
और ये दोनों दुष्ट होयँ तो अनेक रोग होते हैं ।
वातदूषित दूधके रोग ।
वातदुष्टं शिशुः स्तन्यं पिबन् वातगदातुरः ।
क्षामस्वरः कृशांगः स्याद्रुद्धविण्मूत्रमारुतः ॥ २ ॥
जो बालक वातदूषित दूधको पीता है उसके वातके रोग होते हैं, उसका शब्द
क्षीण होजाय, शरीर कृश होय और मलमूत्र तथा अधोवायु नहीं उतरे ॥
पित्तदूषित दूधके रोग ।
स्विन्नो भिन्नमलो बालः कामलापित्तरोगवान् ।
तृष्णालुरुष्णसर्वांगः पित्तदुष्टं पयः पिबन् ॥ ३ ॥
जो बालक पित्तदूषित दूधको पीवे उसके पसीना आवे, मल पतला हो जाय,
कामलारोग होय तथा पित्तके और भी रोग होयँ, प्यासका लगना, सर्वांगमें दाह
आदि अनेक रोग होयँ ॥
कफदूषितदूधके रोग ।
कफदुष्टं पिबन् क्षीरं लालालुः श्लेष्मरोगवान् ।
निद्रार्दितो जडः शूनः शुक्लाक्षश्छर्दनः शिशुः ॥ ४ ॥
जो बालक कफदूषित दूधको पीवे उसके मुखसे लार बहुत गिरे तथा कफके
रोग होयँ, निद्रा आवे, अंग भारी होय, सूजन होय, वमन होय, खुजली चले ॥
बालकोंकी अन्तर्गत पीडा जाननेका उपाय ।
शिशोस्तीव्रामतीव्रां च रोदनाल्लक्षयेद्रुजम् ।
स यं स्पृशेद्भृशं देशं यत्र च स्पर्शनाक्षमः ॥ ५ ॥
तत्र विद्याद्रुजं मूर्ध्नि रुजं चाक्षिनिमीलनात् ।
कोष्ठे विबंधवमथुस्तनदंशांत्रकूजनैः ॥ ६ ॥
CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA