माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)
Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation
माधवकर द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 346, कुल 404 में से
संदर्भ में पढ़ें( ३२८ ) माधवनिदान ।
शुक्तिरोगके लक्षण ।
श्यावाः स्युः पिशितनिभास्तु बिंदवो ये
शुक्त्याभाः सितनियताः स शुक्तिसंज्ञः ॥
नेत्रके सफेद भागमें श्यामवर्ण मांसतुल्य सीपीके समान जो बिन्दु होय उसको
शुक्ति कहते हैं ॥
अर्जुनके लक्षण ।
एको यः शशरुधिरोपमश्च बिन्दुः
शुक्लस्थो भवति तदर्जुनं वदंति ॥ ६९ ॥
शुक्लभागमें शश (खरगोश) के रुधिरके समान जो बिन्दु (बून्द) नेत्रमें
उत्पन्न होय उसको अर्जुन कहते हैं ॥
पिष्टकके लक्षण ।
श्लेष्ममारुतकोपेन शुक्ले मांसं समुन्नतम् ।
पिष्टवत्पिष्टकं विद्धि मलाक्तादर्शसन्निभम् ॥ ७० ॥
कफ वायुके कोपसे शुक्लभागमें पिष्ट (पिसासा) जो मांस बढे उसको पिष्टक
कहते हैं, वह मलसे मिले आदर्श (ऐनक) के समान होता है ॥
जालके लक्षण ।
जालाभः कठिनशिरो महान् सरक्तः
संतानः स्मृत इह जालसंज्ञितस्तु ॥
नेत्रके सफेद भागमें शिरा (नस) का समूह जालीके समान होय और वह कठिन
तथा रुधिरके समान लाल होवे उसको जाल कहते हैं ॥
शिराजपिडिकाके लक्षण ।
शुक्लस्थाः सितपिडिकाः शिरावृता या-
स्ता ब्रूयादसितसमीपजाः शिराजाः ॥ ७१ ॥
नेत्रके शुक्लभागमें शिरा (नसों) से व्याप्त ऐसी सफेद फुन्सी होय, उसको
शिराजपिडिका कहते हैं वह कृष्णभागके समीप होती है ॥
बलासके लक्षण ।
कांस्याभोऽमृदुरथ वारिबिन्दुकल्पो
विज्ञेयो नयनसिते बलाससंज्ञः ॥ ७२ ॥
१ मारुता पीडितः श्लेष्मा शुक्लभागे व्यवस्थितः । जलबिन्दुरिवोच्छूनोऽमृदुः स कफसम्भवः ।१
वलासग्रथितं नाम त शाफ दृष्टमादिशेत् ॥