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सर्वकोश
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

माधवकर द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ

पृष्ठ 328, कुल 404 में से

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पृष्ठ 328

( ३१० ) माधवनिदान ।
पूर्वरूपके लक्षण ।
क्षवप्रवृत्तिः शिरसोऽतिपूर्णता स्तम्भोऽङ्गमर्दः परिहृष्टरोमता ।
उपद्रवाश्चाप्यपरे पृथग्विधा नृणां प्रतिश्यायपुरःसराःस्मृताः ॥१६॥
छींकका आना, मस्तकका भारी होना, अंगोंका जकड जाना तथा अंगोंका
टूटना, रोमांचं अवमंथसे आदि ले और धूमादिक तत्काल होनेवाला उपद्रव होय,
जब जुकाम होनेहारी होती है तब ये लक्षण होते हैं ॥
वातिकप्रतिश्यायके लक्षण ।
आनद्धा पिहिता नासा तनुस्रावप्रसेकिनी ।
गलताल्वोष्ठशोषश्च निस्तोदः शङ्खयोरपि ।
भवेत्स्वरोपघातश्च प्रतिश्यायेऽनिलात्मजे ॥ १७ ॥
जिसकी नाकका मार्ग रुकजाय, आच्छादित होजाय और उसमेंसे पतला पानी
निकले, गला तालू होठ ये सूखजायँ और कनपटी दूखे, गला बैठजाय ये वातके
जुकामके लक्षण हैं ॥
पैत्तिकप्रतिश्यायके लक्षण ।
उष्णः सपीतकः स्रावो घ्राणात्स्रवति पैत्तिके ॥ १८ ॥
कृशोऽतिपाण्डुः सन्तप्तो भवेदुष्णाभिपीडितः ।
सधूममग्निं सहसा वमतीव च नासया ॥ १९ ॥
जिसकी नाकसे दाह और पीला स्राव होवे, वह मनुष्य कृश और पीला
होजाय, उसका देह गरम रहे, नाकसे अग्निके समान धुआं निकले यह पित्तकी
पीनसके लक्षण हैं ॥
श्लैष्मिकके लक्षण ।
घ्राणात्कफः कफकृते श्वेतः पीतः स्रवेद्बहुः ।
शुक्लाsubभासः शूनाक्षो भवेद्गुरुशिरा नरः ॥ २० ॥
कण्ठताल्वोष्ठशिरसां कण्डूभिरभिपीडितः ॥ २१ ॥
नाकसे सफेद पीला बहुत कफ गिरे, उसकी देह सफेद हो जाय, नेत्रोंके ऊपर
सूजन होय और मस्तक भारी रहे और गला तालु होठ और शिर इनमें खुजली
विशेष चले ये कफकी पीनसके लक्षण हैं ॥
१ पूर्वरूपाणि दृश्यंते प्रतिश्याये भविष्यति । घ्राणधूमायनं मन्याक्षवथुस्तालुदालनम् ॥
कंठे ध्वंसो मुखे स्रावः शिरस्यापूरणं तथा ॥