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सर्वकोश
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

माधवकर द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ

पृष्ठ 326, कुल 404 में से

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पृष्ठ 326

( ३०८ ) माधवनिदान ।
आगन्तुजक्षवथुके लक्षण ।
तीक्ष्णोपयोगादतिजिघ्रतो वा भावान्कटूनर्कनिरीक्षणाद्वा ।
सूत्रादिभिर्वा तरुणास्थिमर्मण्युद्घाटितेऽन्यः क्षवथुर्निरेति ॥ ६ ॥
तीखे राई आदि पदार्थ खानेसे, अथवा कडुवा खानेसे, मिरचआदि तीखी वस्तु-
ओंके अत्यन्त सूंघनेसे, सूर्यके देखनेसे, अथवा कपडेकी बत्ती बनाकर नाकमें तरु-
णास्थि मर्म (फणामर्म) में लगानेसे आगन्तुज क्षवथु (छींक) आती है। आग-
न्तुज और दोषज छींक एक ही है ॥
भ्रंशथुके लक्षण ।
प्रभ्रश्यते नासिकया हि यस्य सांद्रो विदग्धो लवणः कफश्च ।
प्राक्संचितो मूर्द्धनि सूर्यतप्ते तं भ्रंशथुं व्याधिमुदाहरन्ति ॥ ७ ॥
सूर्यकी गरमी करके मस्तक तप्त होनेसे पूर्व संचितभया विदग्ध गाढा खारी ऐसा
कफ नाकसे गिरे उस व्याधिको भ्रंशथुरोग कहते हैं ॥
दीप्तके लक्षण ।
घ्राणे भृशं दाहसमन्विते तु विनिश्चरेद्धूम इवेह वायुः ।
नासा प्रदीप्तेव च यस्य जन्तोर्व्याधिं तु तं दीप्तमुदाहरन्ति ॥८॥
नाक अत्यन्त दाहयुक्त होनेसे उसमें वायु धूएँके सदृश विचरे और नाक प्रदीप्त
होवे अर्थात् गरम होवे इस रोगको दीप्त कहते हैं ॥
प्रतिनाहके लक्षण ।
उच्छ्वासमार्गं तु कफः सवातो रुंध्यात्प्रतिनाहमुदाहरेत्तम् ।
वायुसहित कफ श्वासके मार्गको बन्द करे, तब नाकका स्वर अच्छी रीतिसे चले
नहीं, इसको प्रतिनाह कहते हैं ॥
नासास्रावके लक्षण ।
घ्राणाद्धनः पीतसितस्तनुर्वा दोषः स्रवेत्स्रावमुदाहरेत्तम् ॥ ९ ॥
नाकसे गाढा पीला अथवा सफेद पतला दोष (कफ) स्रवे, उसको स्राव
कहते हैं ॥
नासापरिशोषके लक्षण ।
घ्राणाश्रिते स्रोतसि मारुतेन गाढं प्रतप्ते परिशोषिते च ।
कृच्छ्राच्छ्वसेदूर्ध्वमधश्च जंतुर्यस्मिन्स नासापरिशोष उक्तः ॥१०॥
वायुसे नासिकाका द्वार अत्यन्त तप्त होकर सूखजाय तब मनुष्य बडे कष्टसे
ऊपर नीचेको श्वास लेय, उस रोगको नासापरिशोष कहते हैं ॥
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