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सर्वकोश
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

माधवकर द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ

पृष्ठ 321, कुल 404 में से

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पृष्ठ 321

भाषाटीकासमेत । ( ३०३ )
बाधिर्य ( बहरा ) के लक्षण ।
यदा शब्दवहं वायुः स्रोत आवृत्य तिष्ठति ।
शुद्धश्लेष्मान्वितो वापि बाधिर्यं तेन जायते ॥ ३ ॥
जिस समय केवल वायु अथवा कफयुक्त वायु शब्द बहानेवाली नाडियोंमें
स्थित होय, तब उस पुरुषके शब्द सुनाई नहीं देय अर्थात् बहरा हो जाय ॥
कर्णक्ष्वेडके लक्षण ।
वायुः पित्तादिभिर्युक्तो वेणुघोषसमं स्वनम् ।
करोति कर्णयोः क्ष्वेडं कर्णक्ष्वेडः स उच्यते ॥ ४ ॥
पित्तादि दाहकरके युक्त वायुसे कानोंमें वेणु ( बंसी ) का शब्द सुनाई देता है
उसको कर्णक्ष्वेड कहते हैं ॥
कर्णस्रावके लक्षण ।
शिरोऽभिघातादथ वा निमज्जतां जले प्रपाकादथवापि विद्रधेः ।
स्रवेद्धि पूयं श्रवणोऽनिलार्दितः स कर्णसंस्राव इति प्रकीर्तितः ॥५॥
शिरमें किसी प्रकारकी चोट लगनेसे अथवा पानीमें गोता मारनेसे अथवा कानमें
विद्रधि पकनेसे वायु कुपित होकर कानोंसे राध बहे उसको कर्णस्राव कहते हैं ॥
कर्णकण्डूके लक्षण ।
मारुतः कफसंयुक्तः कर्णकण्डूं करोति च ।
कफसे मिला वायु कानोंमें खुजली उत्पन्न करता है ॥
कर्णगूथके लक्षण ।
पित्तोष्मशोषितः श्लेष्मा जायते कर्णगूथकः ॥ ६ ॥
पित्तकी गरमीसे कफ सूखकर कानमें मैल जमे, उसको कर्णगूथ कहते हैं ॥
कर्णप्रतिनाहके लक्षण ।
स कर्णगूथो द्रवतां यदा गतो विलायितो घ्राणमुखं प्रपद्यते ।
तदा स कर्णप्रतिनाहसंज्ञितो भवेद्विकारः शिरसोऽर्द्धभेदकृत् ॥ ७ ॥
वही कानका मैल पतला होनेसे, अथवा स्नेह स्वेदादिकोंकरके पतला होकर मुख
और नाकमें प्राप्त होय, तब उसको कर्णप्रतिनाह कहते हैं, इस रोगसे अर्द्धशिर
( आधासीसीका ) विकार होता है ॥
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