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सर्वकोश
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

माधवकर द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ

पृष्ठ 284, कुल 404 में से

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पृष्ठ 284

( २६६ ) माधवनिदान ।
बादीसे विसर्प जो होय उसके लक्षण वातज्वरके समान होते हैं तथा उसमें
सूजन, फरकना, नोंचनेकीसी पीडा, तोडनेकीसी पीडा, दर्द और रोमांच खड़े
हों, तथा वह विसर्प लम्बा होय है ॥
पित्तविसर्पके लक्षण ।
पित्ताद् द्रुतगतिः पित्तज्वरलिङ्गोऽतिलोहितः ।
पित्तके विसर्पकी गति शीघ्र होय अर्थात् वह जल्दी फैल जाय तथा पित्तज्वरके
लक्षण इसमें मिलते हों तथा अत्यन्त लाल होय ॥
कफविसर्पके लक्षण ।
कफात्कण्डूयुतः स्निग्धः कफज्वरसमानरुक् ॥ ६ ॥
कफकी विसर्पमें खुजली बहुत होय तथा चिकनी होय और उसमें कफ-
ज्वरकीसी पीडा होय ॥
सन्निपातविसर्पके लक्षण ।
सन्निपातसमुत्थश्च सर्वरूपसमन्वितः ।
सन्निपातजन्य विसर्पमें जो वातादिकोंके लक्षण कहे हैं सो सब होयँ ॥
अग्निविसर्पके लक्षण ।
वातपित्ताज्ज्वरच्छर्द्दिमूर्च्छातीसारतृड्भ्रमैः ॥ ७ ॥
अस्थिभेदाग्निसदनतमकारोचकैर्युतः ।
करोति सर्वमङ्गं च दीप्ताङ्गारावकीर्णवत् ॥ ८ ॥
यं यं देशं विसर्पश्च विसर्पति भवेच्च सः ।
शांतांगारासितो नीलो रक्तो वाऽऽशूपचीयते ॥ ९ ॥
अग्निदग्ध इव स्फोटैः शीघ्रगत्वाद द्रुतं च सः ।
मर्मानुसारी वीसर्पः स्याद्वातोऽतिबलस्ततः ॥ १० ॥
व्यथेताङ्गं हरेत्संज्ञां निद्रां च श्वासमीरयेत् ।
हिक्कां च स ततोऽवस्थामीदृशीं लभते नरः ॥ ११ ॥
क्वचिच्छर्म्मार्रतिग्रस्तो भूमिशय्यासनादिषु ।
चेष्टमानस्ततः क्लिष्टो मनोदेहसमुद्भवाम् ॥
दुर्बोधामश्नुते निद्रां सोऽग्निवीसर्प उच्यते ॥ १२ ॥
वातपित्तसे प्रगट विसर्प ज्वर, वमन, मूर्च्छा, अतिसार, प्यास, भौंर, हड-
फूटन, मन्दाग्नि, अन्धकारदर्शन, अन्नद्वेष इन लक्षणों करके संयुक्त होय,