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सर्वकोश
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

माधवकर द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ

पृष्ठ 268, कुल 404 में से

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पृष्ठ 268

( २५० ) माधवनिदान ।
स्पर्शहानिके लक्षण ।
स्पर्शहानिं तु जनयेच्छोणितं शूकदूषितम् ।
शूकका लेप करनेसे रुधिर दूषित होकर त्वचाके स्पर्शज्ञानको नष्ट करे है ॥
उत्तमाके लक्षण ।
मुद्गमाषोपमा रक्ता रक्तपित्तोद्भवाश्च याः ।
व्याधिरेषोत्तमा नाम शूकोऽजीर्णनिमित्तजः ॥ ८ ॥
शूकका वारम्वार लेप करनेसे रक्तपित्त कुपित होकर मूंग उडदके समान लाल
फुन्सी लिंगेन्द्रियमें होयं उसको उत्तमा कहते हैं ये अजीर्णके कारण होती है ॥
शतपोनकके लक्षण ।
छिद्रैरणुमुखैर्लिंगं चितं यस्य समंततः ।
वातशोणितजो व्याधिर्विज्ञेयः शतपोनकः ॥ ९ ॥
जिस पुरुषके लिंगमें अनेक बारीक छिद्र हो जायँ, यह व्याधि वातशोणितसे
प्रगट होती है इसको शतपोनक कहते हैं ॥
त्वक्पाकके लक्षण ।
वातपित्तकृतो यस्तु त्वक्पाको ज्वरदाहवान् ॥ १० ॥
वातपित्तसे लिंगकी त्वचा पक जाय और उसमें ज्वर दाह होय है ॥
शोणितार्बुदके लक्षण ।
कृष्णैः स्फोटैः सरक्ताभिः पिडिकाभिर्निपीडितम् ।
यस्य वास्तुरुजा चोग्रा ज्ञेयं तच्छोणितार्बुदम् ॥ ११ ॥
जिस पुरुषकी लिंगेन्द्रियके ऊपर काले लाल फफोले और पिडिका (फुंसियां)
हों वे पीडित हों तथा व्रणके स्थानमें पीडा होय उसको शोणितार्बुद कहते हैं ॥
मांसार्बुदके लक्षण ।
मांसदोषेण जानीयादर्बुदं मांससम्भवम् ।
मांस दुष्ट होनेसे मांसार्बुद प्रगट होता है ॥
मांसपाकके लक्षण ।
शीर्यन्ते यस्य मांसानि यस्य सर्वाश्च वेदनाः ।
विद्यात्तं मांसपाकं तु सर्वदोषकृतं भिषक् ॥ १२ ॥
जिसकी इन्द्रियका मांस गलजाय और अनेक प्रकारकी पीडा होय यह व्याधि
त्रिदोषज है, इस व्याधिको मांसपाक कहते हैं ॥

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