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सर्वकोश
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

माधवकर द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ

पृष्ठ 262, कुल 404 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 262

( २४४ ) माधवनिदान ।
परिस्रावीभगन्दरके लक्षण ।
कण्डूयनो घनस्त्रावी कठिनो मंदवेदनः ।
श्वेतावभासः कफजः परिस्रावी भगंदरः ॥ ५ ॥
कफसे प्रगट भये भगन्दरमें खुजली चले तथा गाढी राध बहे, पिडिका कठिन
होयँ, पीडा थोडी होय, वर्ण सफेद होय, उसको परिस्रावी भगन्दर कहते हैं ॥
शम्बूकावर्तके लक्षण ।
बहुवर्णरुजास्त्रावाः पिडिका गोस्तनोपमाः ।
शंबूकावर्तवन्नाडी शंबूकावर्तको मतः ॥ ६ ॥
जिसमें गौके थनके समान अनेक पिडिका होयँ, उनका रंग पीला और स्राव
अनेक प्रकारका होय, व्रण शंखके आँटेके समान होय, इसको शम्बूकावर्त कहते हैं॥
उन्मार्गीभगन्दरके लक्षण ।
क्षताद्गतिः पायुगता विवर्धते ह्युपेक्षणात्स्युः कृमयो विदार्यते ।
प्रकुर्वते मार्गमनेकधामुकैर्व्रणैस्तदुन्मार्गीभगंदरं वदेत् ॥ ७ ॥
गुदामें कांटे आदिके लगनेसे क्षत ( घाव ) हो जाय, उस घावकी उपेक्षा कर-
नेसे कृमि पडजायँ, वे कृमि उस क्षतको विदारण करें ऐसे वह घाव गुदापर्यंत बढ-
कर पहुंचे तथा कृमि उसमें अनेक मुखवाले ( व्रण ) घाव करलेवें इसको उन्मार्गी-
भगन्दर कहते हैं ॥
साध्यासाध्य लक्षण ।
घोराः साधयितुं दुःखाः सर्व एव भगंदराः ।
तेष्वसाध्यस्त्रिदोषोत्थः क्षतजश्च विशेषतः ॥ ८ ॥
सब भगन्दर दुःसाध्य हैं तिनमें भी त्रिदोषका भगन्दर असाध्य है और क्षतज
विशेषकर असाध्य है ॥
असाध्यके लक्षण ।
वातमूत्रपुरीषाणि क्रिमयः शुक्रमेव च ।
भगंदरात्प्रस्रवन्ति नाशयन्ति तमातुरम् ॥ ९ ॥
जिस भगन्दरमेंसे अधोवायु, मूत्र, विष्ठा, कृमि और वीर्य बहे उस रोगीका
नाश होय ॥
इति श्रीपण्डितदत्तराममाथुरनिर्मितमाधवार्थबोधिनीमाथुरीभाषाटीकायां
भगन्दरनिदानं समाप्तम् ॥
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