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सर्वकोश
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

माधवकर द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ

पृष्ठ 252, कुल 404 में से

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पृष्ठ 252

( २३४ ) माधवनिदान ।
लोहेकीसी वास आवे, अंगोंमें दुर्गंध, हृदय और पसवाडोंमें शूल ये लक्षण होते हैं।
इनसे जो विशेष लक्षण हैं उनको मुझसे सुन ॥
आमाशयस्थित रक्तके लक्षण ।
आमाशयस्थे रुधिरे रुधिरं छर्दयत्यपि ।
आध्मानमतिमात्रं च शूलं च भृशदारुणम् ॥ ९ ॥
आमाशयमें रुधिरका संचय होनेसे रुधिरकी वमन, पेट बहुत फूले और अत्यन्त
भयंकर शूल होय ॥
पक्वाशयस्थके लक्षण ।
पक्वाशयगते चापि रुजा गौरवमेव च ।
अधःकाये विशेषेण शीतता च भवेदिह ॥ १० ॥
पक्वाशयमें रुधिरका सञ्चय होनेसे शूल, देहमें भारीपना और कमरसे लेकर
नीचेके भागमें शीतलता होय है ॥
विद्धव्रणके लक्षण ।
सूक्ष्मास्यशल्याभिहतं यदङ्गं त्वाशयं विना ।
उत्तुंडितं निर्गतं वा तद्विद्धमिति निर्दिशेत् ॥ ११ ॥
बारीक अग्रभागवाले सुई आदि शल्यसे आमादि आशय विना जो अंग है
उनमें वेध होनेसे 'तुंडित' कहिये उनमेंसे वह शल्य न निकला होय, 'निर्गत' कहिये
शल्य निकल गया हो उसको विद्धव्रण कहते हैं ॥
क्षतके लक्षण ।
नातिच्छिन्नं नातिभिन्नमुभयोर्लक्षणान्वितम् ।
विषमं व्रणमंगेषु तत्क्षतं त्वभिनिर्दिशेत् ॥ १२ ॥
जिसमें अंग अतिछिन्न तथा अतिभिन्न न भया हो और दोनोंके लक्षण मिलते
हों तथा व्रण तिरछा बाँका होय, उसको क्षतव्रण कहते हैं ॥
पिच्चितके लक्षण ।
प्रहारपीडनाभ्यां तु यदङ्गं पृथुतां गतम् ।
सास्थि तत्पिच्चितं विद्यान्मज्जारक्तपरिप्लुतम् ॥ १३ ॥
१ शल्यं नाम–विविधतृणकाष्ठपांसुलोष्टारिष्टवालनखपूयास्रावान्तर्गर्भादयः ।