सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

माधवकर द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ

पृष्ठ 244, कुल 404 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 244

( २२६ ) माधवनिदान ।
अथ व्रणनिदानम् ।
एकदेशोत्थितः शोथो व्रणानां पूर्वरक्षणम् ।
षड्विधः स्यात्पृथक् सर्वैरक्तागन्तुनिमित्तजः ॥ १ ॥
शोथाः षडेते विज्ञेयाः प्रागुक्तैः शोथलक्षणैः ।
विशेषः कथ्यते तेषां पक्वापक्वविनिश्चये ॥ २ ॥
एक ठिकानेपर सूजन उत्पन्न होनेसे जाने कि, इसके व्रण ( फोडा ) होगा सो
व्रणरोग पृथक् दोषोंसे ३, सन्निपातसे १, रुधिरसे १ और आगंतुज १ ऐसे मिल-
कर छः प्रकारका है, इन छहों व्रणोंमें जो प्रथम सूजन होय उसके लक्षण शोथरोग-
लक्षणके समान जानने । इनमें पक्व ( पकने ) अपक्व ( न पकने ) के विषयमें
जो विशेषता है उसको इस जगह कहते हैं ॥
वातादिभेदसे व्रणके पाक ।
विषमं पच्यते वातात्पित्तोत्थश्चाचिराच्चिरम् ।
कफजः पित्तवच्छोफो रक्तागंतुसमुद्भवः ॥ ३ ॥
बादीसे विषम पाक होय अर्थात् कहीं पके, कहीं नहीं पके, पित्तसे बहुत जल्दी
पके, कफका फोडा देरमें पके और रुधिरका तथा आगन्तुज फोडेका पकना पित्तके
समान अर्थात् जल्दी पके है ॥
कच्चे फोडेका लक्षण ।
मन्दोष्मताऽल्पशोथत्वं काठिन्यं त्वक्सवर्णता ।
मन्दवेदनता चैव शोथानामामलक्षणम् ॥ ४ ॥
सूजन हाथके छूनेसे थोडी गरम लगे, थोडी सूजन होय, फोडेका स्थान करडा
होय तथा देहके रंग समान उसका रंग होय और उसमें पीडा मन्द होय ये कच्ची
सूजनके लक्षण हैं ॥
पच्यमानव्रणके लक्षण ।
दह्यते दहनेनेव क्षारेणेव च पच्यते ।
पिपीलिकागणेनेव दश्यते छिद्यते तथा ॥ ५ ॥
भिद्यते चैव शस्त्रेण दंडेनेव च ताड्यते ।
पीड्यते पाणिनेवान्तः सूचीभिरिव तुद्यते ॥ ६ ॥
CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA