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सर्वकोश
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

माधवकर द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ

पृष्ठ 229, कुल 404 में से

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पृष्ठ 229

भाषाटीकासमेत । ( २११ )
अथान्डवृद्धिनिदानम् ।
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अण्डवृद्धिकी सम्प्राप्ति ।
क्रुद्धोऽनूर्ध्वगतिर्वायुः शोथशूलकरश्चरन् ।
मुष्कौ वंक्षणतः प्राप्य फलकोशाभिवाहिनीः ॥
प्रपीड्य धमनीर्वृद्धिं करोति फलकोशयोः ॥ १ ॥
कुपित भई अधोगमनशील ( नीचे विचरनेवाली ) तथा सूजन और शूल उत्पन्न
करनेवाली वायु संचार करती हुई वंक्षण ( लिंग और जंघोंकी सन्धि ) से अण्ड-
कोशोंमें आय कर अण्ड और कोश अथवा अण्डोंके कोशोंके बहनेवाली धमनियोंको
दुष्ट कर अण्डकोशकी ( दोनों अंडोंकी अथवा एक ओरके अण्डकी ) वृद्धि करै है॥
दोषास्रमेदोमूत्रान्त्रैः स वृद्धिः सप्तधा गदः ।
मूत्रान्त्रजावप्यनिलाद्धेतुभेदस्तुं केवलम् ॥ २ ॥
वह वृद्धिरोग तीनों दोषोंसे ३, रुधिरसे १, मेदसे १, मूत्रसे १ और आंतोंसे १
ऐसे सात प्रकारका है। मूत्रज और अन्त्रजवृद्धि ये दोनों वायुसे होती हैं, परन्तु इन
दोनोंका निदान चिकित्सा में भेद होनेसे पृथक् ग्रहण करा है। सो लिखा भी है—
“ मूत्रान्त्रजावप्यनिलाद्धेतुभेदस्तु केवलम् ” इति ॥
वातकी अण्डवृद्धिके लक्षण ।
वातपूर्णादृतिस्पर्शो रूक्षो वातादहेतुरुक् ॥ ३ ॥
वातसे भरी मसक जैसी हाथके लगनेसे मालूम होय ऐसा मालूम होय, रूक्ष और
विना कारण दुखने लगे, वह वातकी अंडवृद्धि जाननी ॥
पित्तकी अंडवृद्धिके लक्षण ।
पक्कोदुम्बरसंकाशः पित्ताद्दाहोष्मपाकवान् ।
पित्तकी अंडवृद्धि पके गूलरके समान होय है तथा दाह और गरमी तथा पक-
नेवाली होय है ॥
कफकी अंडवृद्धिके लक्षण ।
कफाच्छीतो गुरुः स्निग्धः कण्डूमान्कठिनोऽल्परुक् ॥ ४ ॥
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१ क्योंकि कहा भी है—दोषदूष्यसंसर्गादायतनविशेषात् निमित्ततश्चैषां व्याधीनां भेदः ॥
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