माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)
Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation
माधवकर द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 212, कुल 404 में से
संदर्भ में पढ़ें( १९४ ) माधवनिदान ।
मधुमेहशब्दकी प्रवृत्ति विषय निमित्त ।
मधुरं यच्च मेहेषु प्रायो मध्विव मेहति ।
सर्वेऽपि मधुमेहाख्या माधुर्याच्च तनोरतः ॥ २६ ॥
प्रमेहोंमें रोगी प्रायशः मधु ( शहद ) के समान मीठा मूते और सब शरीरको
मीठा करदे इसीसे सर्व प्रमेहको मधुमेह संज्ञा दीनी है और अमृतसागरमें जो छः
प्रमेह आत्रेयके मतसे लिखे हैं वे प्रमाणरहित हैं और प्रसिद्धमें भी प्रमेह बीस प्रका-
रके हैं इसीसे हमने छोडदीने हैं ॥
इति श्रीपण्डितदत्ताराममाथुरनिर्मितमाधवार्थबोधिनीभाषाटीकायां
प्रमेहनिदानं समाप्तम् ॥
अथ प्रमेहपिडिकानिदानम् ।
शराविका कच्छपिका जालनी विनताऽलजी । मसूरिका
सर्षपिका पुत्रिणी सविदारिका ॥ १ ॥ विद्रधिश्चेति पिडिकाः
प्रमेहोपेक्षया दश । सन्धिमर्मसु जायन्ते मांसलेषु च धामसु ॥२॥
प्रमेहकी उपेक्षा करनेसे शराविकादि दश पिडिका सन्धि मर्म और मांसल
ठिकानोंमें होती हैं ॥
सबके लक्षण ।
अन्तोन्नता च तद्रूपा निम्नमध्या शराविका । सदाहा कूर्मसं-
स्थाना ज्ञेया कच्छपिका बुधैः ॥ ३ ॥ जालनी तीव्रदाहा तु
मांसजालसमावृता । अवगाढरुजोत्क्लेदा पृष्ठे वाप्युदरेऽपि वा
॥ ४ ॥ महती पिडिका नीला सा बुधैर्विनता स्मृता । रक्ता
सिता स्फोटवती दारुणा त्वलजी भवेत् ॥ ५ ॥ मसूरदल-
संस्थाना विज्ञेया तु मसूरिका । गौरसर्षपसंस्थाना तत्प्रमाणा
च सर्षपी ॥६॥ महत्यल्पचिता ज्ञेया पिडिका चापि पुत्रिणी ।
विदारीकन्दवद्वृत्ता कठिना च विदारिका ॥ विद्रधेर्लक्षणैर्युक्ता
ज्ञेया विद्रधिका तु सा ॥ ७ ॥
१ शराविका-यही पिटिका ऊपरके भागमें ऊंची और मध्यमें बैठीसी होय
जैसा मिट्टीका शराव होय है ऐसी होय है । २ कच्छपिका-ये कछुएके पीठके समान