सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

माधवकर द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ

पृष्ठ 207, कुल 404 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 207

ॐ श्रीशं वन्दे । 189
माधवनिदानम् ।
भाषाटीकासमेतम् ।
उत्तर भाग ।
अथ प्रमेहनिदानम् ।
आस्यासुखं स्वप्नसुखं दधीनि ग्राम्यौदकानूपरसाः पयांसि ।
नवान्नपानं गुडवैकृतं च प्रमेहहेतुः कफकृच्च सर्वम् ॥ १ ॥
बैठनेके सुखसे, निद्राके सुखसे अथवा स्वप्नसुख कहिये स्वप्नमें स्त्रीप्रसंग आदि
सुखसे, दही, ग्रामके संचारी जीव भेड बकरी आदि, जलके संचारी जीव मच्छी
कछुआ आदि, अनूप ( जलसमीप ) के रहनेवाले जीव हंस चकवा आदि प्राणियोंके
मांसरस, दूध, नया अन्न और नया जल तथा शर्करा आदि गुडके पदार्थ अथवा गुडके
विकार ये और जितने कफकारक पदार्थ हैं सो सब प्रमेह होनेके कारण हैं ॥
कफपित्तवातप्रमेहोंकी क्रमसे सम्प्राप्ति ।
मेदश्च मांसं च शरीरजं च क्लेदं कफो बस्तिगतः प्रदूष्य ।
करोति मेहान्समुदीर्णमुष्णैस्तानेव पित्तं परिदूष्य चापि ॥ २ ॥
क्षीनेषु दोषेष्ववकृष्य धातून्संदूष्य मेहान्कुरुतेऽनिलश्च ।
साध्याः कफोत्था दश पित्तजाः षड् याप्या न साध्याः पवनाच्चतुष्काः॥
समक्रियत्वाद्विषमक्रियत्वान्महात्ययत्वाच्च यथाक्रमं ते ॥ ३ ॥
बस्ति ( मूत्रस्थान ) गत कफ मेद मांस और शरीरके क्लेदको बिगाडकर प्रमे-
हको उत्पन्न करे है, उसी प्रकार गरम पदार्थसे पित्त कुपित होकर पूर्वोक्त मेद
मांसको बिगाडकर प्रमेहको उत्पन्न करे है और लंघन रूक्षादि पदार्थोंके सेवनसे
कुपित भया वायु दोष ( पित्तकफ ) के क्षीण होनेसे धातु ( वसा मज्जा ओज
लसीका ) को ईंचकर वस्तिके मुखपर लाकर प्रमेहको प्रगट करे है । कफसे
प्रगट दश प्रमेह साध्य हैं । कारण इसका यह है कि, कफ दोष और मेदःप्रभृति
दूष्य इनपर कटुतिक्तादि क्रिया समान है अर्थात् कटु तिक्तादिकोंसे विकृत कफ
तथा मेद मांसादि शांत होते हैं । इस रोगमें रोगका ही प्रभाव ऐसा है कि, इसमें
तुल्यं दूष्यको साध्य कहा है और प्रमेहके बिना और रोगोंको अतुल्य ( असमान
१ ज्वरे तुल्यर्तुदोषत्वं प्रमेहे तुल्यदूष्यता । रक्तगुल्मे पुरातनत्वं सुखसाध्यस्य लक्षणम् ॥