माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)
Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation
माधवकर द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 185, कुल 404 में से
संदर्भ में पढ़ेंभाषाटीकासमेत । ( १६७ )
वातिक परिणामशूलके लक्षण ।
आध्मानाटोपविण्मूत्रनिबन्धारतिवेपनैः ।
स्निग्धोष्णोपशमप्रायं वातिकं तद्वदेद्भिषक् ॥ १७ ॥
पेटका फूलना तथा पेटमें गुडगुडशब्द, मलमूत्रका अवरोध, अरति ( मनका
न लगना ), कम्प ये लक्षण हों और चिकना, गरम पदार्थसे शांत होय ऐसे
शूलको वातिक कहते हैं ॥
पैत्तिक परिणामशूलके लक्षण ।
तृष्णादाहारतिस्वेदकट्वम्ललवणोत्तरम् ।
शूलं शीतशमप्रायं पैत्तिकं लक्षयेद् बुधः ॥ १८ ॥
प्यास, दाह, चित्तका न लगना, पसीना ये लक्षण होयँ । तीखा, खट्टा, नोनका
ऐसे पदार्थ खानेसे बढनेवाला और शीतल पदार्थके सेवनसे शांत होय ऐसा शूल
पित्तका जानना ॥
श्लैष्मिक परिणामशूलके लक्षण ।
छर्दिहल्लाससंमोहस्वल्परुग्दीर्घसन्तति ।
कटुतिक्तोपशान्तं च तच्च ज्ञेयं कफात्मकम् ॥ १९ ॥
वमन, अफरा और संमोह ( इंद्रिय और मनको मोह ) ये लक्षण जिसमें बहुत
होयँ, पीडा थोडी होय, शूल बहुत दिन रहे, कडुवे और तीखे पदार्थसे शांत होय
उस शूलको कफात्मक जानना ॥
द्विदोषज और त्रिदोषजके लक्षण ।
संसृष्टलक्षणं यच्च द्विदोषं परिकल्पयेत् ।
त्रिदोषजमसाध्यं तु क्षीणमांसबलानलम् ॥ २० ॥
जिसमें दो दोषोंके लक्षण मिले हों उसको द्वंद्वज कहते हैं और तीन दोषोंके
लक्षणोंसे त्रिदोषज जानना । मांस बल और अग्नि ये जिसके क्षीण होगये हों ऐसा
शूलरोग असाध्य जानना ॥
अन्नके उपद्रवसे प्रगट शूलके लक्षण ।
जीर्णे जीर्यत्यजीर्णे वा यच्छूलमुपजायते ।
पथ्यापथ्यप्रयोगेन भोजनाभोजनेन च ॥
न शमं याति नियमात्सोऽन्नद्रव उदाहृतः ॥ २१ ॥
CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA