माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)
Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation
माधवकर द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 155, कुल 404 में से
संदर्भ में पढ़ेंभाषाटीकासमेत । ( १३७ )
उदाहरण दिखाते हैं, जैसे-पुरुषका इष्टनाशादि सुनना मिथ्यायोग है, पटहादि
बाजोंका सुनना अतियोग है, कुछ न सुनना अयोग है । ऐसेही अपवित्र आदिको
छूना मिथ्यायोग है, अतिशीतल अतिगरम छूना, स्नान उबटना आदिका सेवन
अतियोग है, किसीको न छूना अयोग है । छोटी वस्तुका देखना मिथ्यायोग है,
बड़ी वस्तुका देखना अतियोग और किसीको न देखना अयोग है । रसोंका
अतिसेवन अतियोग है, थोडा सेवन मिथ्यायोग है, असेवन अयोग है । दुर्गन्धका
सूँघना मिथ्यायोग है, अतितीक्ष्ण गन्धका सूँघना अतियोग है, किसीको न
सूँघना अयोग है । तहां कायिक, वाचिक, मानसिक तीन प्रकारका कर्म कहा
है । तहां कायिक कर्म जैसे कुसमयमें दंडकसरतका करना मिथ्यायोग, बहुत
करना अतियोग, कुछ न करना अयोग है । खोटा और झूठा बोलना वाणीका
मिथ्यायोग है, बहुत बोलना अतियोग है, चुप होजाना अयोग है । मानसकर्म जैसे
शोकादि चिंतवन मानसिक मिथ्यायोग है, अत्यन्त चिंता करना अतियोग है
और किसीकी चिंता न करना अयोग है इति ॥ आगे श्लोक माधवके हैं ॥
अपस्मारके सामान्य लक्षण ।
तमःप्रवेशः संरम्भो दोषोद्रेकहतस्मृतिः ।
अपस्मार इति ज्ञेयो गदो घोरश्चतुर्विधः ॥ १ ॥
अन्धकारमें प्रवेश करनेके समान ज्ञानका नाश होना, नेत्र टेढे बांके फिर दोषोंके
बढनेसे ज्ञानका नष्ट होना ये लक्षण जिस रोगमें होयं ऐसा भयंकर अपस्मार रोग
चार प्रकारका है, इसको लोग संसारमें मिरगी ऐसे कहते हैं ॥
पूर्वरूप ।
हृत्कम्पः शून्यता स्वेदो ध्यानं मूर्च्छा प्रमूढता ।
निद्रानाशश्च तस्मिंस्तु भविष्यति भवन्त्यथ ॥ २ ॥
जब अपस्मार होनेवाला होय है तब ये लक्षण होते हैं, हृदय कांपे और शून्य
पड जाय-कुछ सूझे नहीं, चिन्ता, मूर्च्छा, पसीने आवे, ध्यान लगजाय, मूर्च्छा
कहिये मनका मोह और प्रमूढता कहिये इन्द्रियोंका मोह होय, निद्रा जाती रहे ॥
वातज अपस्मारके लक्षण ।
कम्पते प्रदशेदन्तान्फेनोद्वामी श्वसित्यपि ।
परुषारुणकृष्णानि पश्येदूपाणि चानिलात् ॥ ३ ॥