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सर्वकोश
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

माधवकर द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ

पृष्ठ 145, कुल 404 में से

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पृष्ठ 145

भाषाटीकासमेत । ( १२७ )
स बाह्याभ्यन्तरं देहं प्रदहेन्मन्दचेतसः ॥ ४ ॥
संशुष्कगलताल्वोष्ठो जिह्वां निष्कृष्य वेपते ।
प्यासके रोकनेसे जलरूप धातु क्षीण होकर तेज कहिये पित्तकी गरमीको बढावे
तब वह गरमी देहके बाहर और भीतर दाह करे, इस दाहसे रोगी बेसुध होय और
गला, तालु, होठ यह अत्यन्त सूखें और जीभको बाहर काढ दे कांपे ॥
शस्त्रघातज दाहके लक्षण ।
असृजः पूर्णकोष्ठस्य दाहोऽन्यः स्यात्सुदुःसहः ॥ ५ ॥
शस्त्र कहिये तलवार आदिके लगनेसे प्रगट रुधिर उस रुधिरसे कोष्ठ कहिये हृदय
भरजाय तब दाह अत्यन्त दुःसह प्रगट होय ॥
धातुक्षयजन्यदाहके लक्षण ।
धातुक्षयोत्थो यो दाहस्तेन मूर्च्छातृषान्वितः ।
क्षामस्वरः क्रियाहीनः स सीदेद्भृशपीडितः ॥ ६ ॥
धातुके क्षय होनेसे जो दाह होय उससे रोगी मूर्च्छा प्यास इनसे युक्त होय,
स्वरभंग और चेष्टाहीन होय और इस दाहसे पीडित होकर यदि चिकित्सा न करावे
तो वह रोगी मरणको प्राप्त होय ॥
क्षतज दाहके लक्षण ।
क्षतजोऽनश्नतश्चान्यः शोचतो वाप्यनेकधा ।
तेनान्तर्दाह्यतेऽत्यर्थं तृष्णामूर्च्छाप्रलापवान् ॥ ७ ॥
क्षत (घाव) के होनेसे जो दाह हो उससे आहार थोडा रहजावे और अनेक
प्रकारके शोककर दाह होय और इस दाहकरके अभ्यन्तरदाह होय तथा प्यास
मूर्च्छा और प्रलाप (बकवाद) ये लक्षण होयँ ॥
मर्माभिघातज दाहके लक्षण ।
मर्माभिघातजोऽप्यस्ति सोऽसाध्यः सप्तमो मतः ।
मर्मस्थान (हृदय शिरा बस्ति) में चोट लगनेसे जो दाह होय सो सातवां
असाध्य है अर्थात् और जो छः दाह हैं वे साध्य हैं ॥
सर्व एव च वर्ज्याः स्युः शीतगात्रस्य देहिनः ॥ ८ ॥
सब दाहोंमें शीतल देहवाला रोगी त्याज्य है ॥
इति श्रीपण्डितदत्तराममाथुरनिर्मितमाधवार्थदीपिकामाथुरीभाषा
टीकायां दाहनिदानं समाप्तम् ॥