माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)
Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation
माधवकर द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 142, कुल 404 में से
संदर्भ में पढ़ें( १२४ ) माधवनिदान ।
उन विकारोंको कहते हैं-
पानात्ययं परमदं पानाजीर्णमथापि वा ।
पानविभ्रममुग्रं च तेषां वक्ष्यामि लक्षणम् ॥ १४ ॥
पानात्यय, परमद, पानाजीर्ण और पानविभ्रम इत्यादि विकार होते हैं उनके
लक्षण कहता हूं ॥
वातमदात्ययके लक्षण ।
हिक्काश्वासशिरःकम्पपार्श्वशूलप्रजागरैः ।
विद्याद्बहुप्रलापस्य वातप्रायं मदात्ययम् ॥ १५ ॥
हिचकी, श्वास, मस्तकका कंप होना, पसवाडोंमें पीडा, निद्राका नाश और अत्यंत
बकवाद ये लक्षण जिसमें होय उसको वातप्रधान मदात्यय जानना ॥
पित्तमदात्ययके लक्षण ।
तृष्णादाहज्वरस्वेदमॊहातीसारविभ्रमैः ।
विद्याद्धरितवर्णस्य पित्तप्रायं मदात्ययम् ॥ १६ ॥
प्यास, दाह, ज्वर, पसीना, मोह, अतिसार, विभ्रम ( कुछ कुछ ज्ञान होय )
देहका वर्ण हरा होय इन लक्षणोंसे पित्तप्रधान मदात्यय जानना ॥
कफमदात्ययके लक्षण ।
छर्द्यरोचकहृल्लासतन्द्रास्तैमित्यगौरवैः ।
विद्याच्छीतपरीतस्य कफप्रायं मदात्ययम् ॥ १७ ॥
वमन ( रद् ), अन्नमें अरुचि, खाली रद् ( ओकारी ), तन्द्रा, देह गीली और
भारी और शीत लगे इन लक्षणोंसे कफप्रधान मदात्यय जानना ॥
सन्निपात मदात्ययके लक्षण ।
ज्ञेयस्त्रिदोषजश्चापि सर्वलिङ्गैर्मदात्ययः ॥ १८ ॥
जिसमें तीनों दोषोंके लक्षण मिलते हों उसको सन्निपातप्रधान मदात्यय जानना ॥
परमदके लक्षण ।
श्लेष्मोच्छ्रयोऽङ्गगुरुता मधुरास्यता च विण्मूत्रसक्तिरथ तन्द्रि-
ररोचकश्च । लिङ्गं परस्य तु मदस्य वदन्ति तज्ज्ञास्तृष्णा
रुजा शिरसि सन्धिषु चातिभेदः ॥ १९ ॥
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