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सर्वकोश
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

माधवकर द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ

पृष्ठ 124, कुल 404 में से

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पृष्ठ 124

( १०६ ) माधवनिदान ।
क्षयजन्यस्वरभेदके लक्षण ।
धूम्येत वाक्क्षयकृते क्षयमाप्नुयाच्च वागेश चापि हतवाक्परिवर्जनीयः।
क्षयीके स्वरभेदवाले पुरुषके बोलते समय मुखसे धुआँसा निकले और वाणी
क्षय हो जाय अर्थात् स्वर नहीं निकले । इस स्वरभेदमें जिस समय वाणी हत हो
जाय अर्थात् ओजका क्षय होनेसे बोलनेकी सामर्थ्य नहीं हो तब यह असाध्य होता
है और ओजका क्षय ( नाश ) नहीं हो तो साध्य है ॥
मेदके स्वरभेदका लक्षण ।
अन्तर्गतस्वरमलक्ष्यपदं चिरेण मेदोन्वयाद्वदति दिग्धगलस्तृषार्त्तः४
मेदके सम्बन्धसे कफ अथवा मेदसे गला लिप्त होय अथवा मेदसे स्वरके मार्ग
रुक जानेसे प्यास बहुत लगे, गलेके भीतर बोले और मन्द बोले ॥
असाध्य लक्षण ।
क्षीणस्य वृद्धस्य कृशस्य चापि चिरोत्थितो यस्य सहोपजातः ।
मेदस्विनः सर्वसमुद्भवश्च स्वरामयो यो न स सिद्धिमेति ॥ ५ ॥
क्षीण पुरुषके, वृद्धके, कृशके, बहुत दिनका, जन्मके संग ही प्रगट भया, मोटें
पुरुषके और सन्निपातोद्भव ऐसा स्वरभेदरोग साध्य नहीं होता ॥
इति श्रीपंडितदत्ताराममाथुरप्रणीतमाधवार्थबोधिनीमाथुरीभाषाटीकायां
स्वरभेदनिदानं समाप्तम् ॥
अथारोचकनिदानम् ।
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वातजादि अरुचियोंके लक्षण ।
वातादिभिः शोकभयातिलोभक्रोधैर्मनोग्राशनरूपगन्धैः ।
अरोचकाः स्युः परिहृष्टदन्तकषायवक्त्रश्च मतोऽनिलेन ॥ १ ॥
पृथक् वातादिक दोषों करके ३, सन्निपातसे १, आगन्तुकसे १ जैसे भयसे
अतिलोभसे तथा अतिक्रोधसे ऐसे पांच प्रकारका अरोचक ( अरुचि ) रोग है । वह
मनको क्लेश देनेवाला अन्न, रूप और गन्ध इन कारणोंसे प्रगट होता है । सुश्रुत
और अन्य ग्रन्थोंके मतसे भी पांच ही प्रकार मुख्य माने हैं, भय, लोभ, क्रोधकी
अरुचिको शोककी ही अरुचिके अन्तर्गत मानते हैं । बादीकी अरुचिसे दांत खट्टे
हो और मुख कसेला होय ॥
१ अरोचको भवेद्दोषैरेको हृदयसंश्रयैः । सन्निपातेन मनसः सन्तापेन च पञ्चमः ॥ इति ॥