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सर्वकोश
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

माधवकर द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ

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पृष्ठ 12

( १० ) माधवनिदानकी-

विषय.पृष्ठाङ्क.विषय.पृष्ठाङ्क.
श्लीपदनिदानम् ।आगन्तुजव्रणनिदानम् ।
श्लीपदकी सम्प्राप्ति, वातजश्लीपद२२०व्रणकी संख्या और सम्प्राप्ति२३२
पित्तजश्लीपद, श्लैष्मिक श्लीपद२२१छिन्नके लक्षण, भिन्नके लक्षण२३३
असाध्य लक्षण”कोष्ठके लक्षण, कोष्ठके भेदोंके लक्षण”
श्लीपदमें कफको प्राधान्य”आमाशयस्थित रक्तके लक्षण२३४
श्लीपद कौनसे देशमें उत्पन्न होय”पक्वाशयस्थके लक्षण, विद्धव्रणके लक्षण”
असाध्य लक्षण”क्षतके लक्षण, पिच्चितके लक्षण”
विद्रधिनिदानम् ।घृष्टके लक्षण, सशल्‍यव्रणके लक्षण, कोष्ठके लक्षण२३५
वातजविद्रधिके लक्षण२२२असाध्य कोष्ठभेद”
पित्तकी विद्रधिके लक्षण”मांस, शिरा, स्नायु और अस्थि और सन्धि
कफकी विद्रधिके लक्षण२२३इन मर्मोंमें चोट लगनेके सामान्य लक्षण”
पकनेके अनन्तर उनका स्राव”मर्मरहित शिराविद्धके लक्षण२३६
सन्निपातकी विद्रधिके लक्षण”स्नायुविद्धके लक्षण, संधिविद्धिके लक्षण२३६
आगन्तुजविद्रधिकी सम्प्राप्ति”हड्डी विन्ध गईहो उसके लक्षण”
रक्तजविद्रधिके लक्षण, अन्तर्विद्रधिके लक्षण२२४शिरादिमर्मविद्ध लक्षण”
विद्रधिके स्थान”मांसविद्धके लक्षण, सर्वव्रणके उपद्रव२३७
स्रावनिर्गम, विद्रधिमें साध्यासाध्य२२५भग्ननिदानम् ।
असाध्य लक्षण”भग्नके दो प्रकार, संधिभग्नके लक्षण२३७
व्रणनिदानम् ।संधिभग्नके सामान्य लक्षण”
वातादिभेदसे व्रणके लक्षण२२६कांडभग्नकथन२३८
कच्चे फोडेके लक्षण, पच्यमानव्रणके लक्षण”कांडभग्नके सामान्य लक्षण, कष्टसाध्यके लक्षण२३९
पक्वव्रणके लक्षण२२७असाध्य लक्षण”
पकनेके समय तीनों दोषोंका सम्बन्ध२२८असावधानतासे असाध्यता२४०
राध न निकालनेसे परिणाम”अस्थिविशेष करके भग्नविशेष”
आमादिलक्षणज्ञानसे वैद्यके गुणदोष”नाडीव्रणनिदानम् ।
अपक्व पक्वकी उपेक्षा करनेमें दोष”नाडीव्रणसंख्या-रूप सम्प्राप्ति२४१
शारीरव्रणनिदानम् ।वातजनाडीव्रणके लक्षण, पित्तके नाडीव्रणके लक्षण”
वातिक व्रण, पित्तव्रणके लक्षण२२९कफनाडीव्रणके लक्षण२४२
कफव्रणके लक्षण, रक्तज द्वन्द्वज व्रणके लक्षण”सन्निपातजनाडीव्रणके लक्षण”
सुखव्रणके लक्षण२३०शल्यजनाडीव्रणके लक्षण, साध्यासाध्य लक्षण”
कृच्छ्र साध्य और असाध्यके लक्षण”भगन्दरनिदानम् ।
दुष्टव्रणके लक्षण, शुद्धव्रणके लक्षण”भगन्दरका पूर्वरूप, शतपोनकके लक्षण२४३
भरनेवाले व्रणके लक्षण”उष्ट्रशिरोधरके लक्षण”
जो व्रण भरगया हो उसके लक्षण२३१परिस्रावी भगन्दरके लक्षण२४४
व्याधिविशेष करके व्रणकां कृच्छ्रसाध्यत्व”शम्बूकावर्तके लक्षण, उन्मार्गिभगन्दरके लक्षण”
साध्यासाध्य लक्षण, असाध्यव्रणके लक्षण”साध्यासाध्य लक्षण, असाध्यके लक्षण”
दूसरे असाध्य लक्षण”उपदंशनिदानम् ।
व्रणरोगमें अपथ्य२३२उपदंशके कारण, वातोपदंशके लक्षण२४५

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