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सर्वकोश
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

माधवकर द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ

पृष्ठ 117, कुल 404 में से

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पृष्ठ 117

भाषाटीकासमेत । (९९)
यमलाके लक्षण ।
चिरेण यमलैर्वेगैर्या हिक्का संप्रवर्त्तते ।
कंपयन्ती शिरो ग्रीवां यमलां तां विनिर्दिशेत् ॥ ७ ॥
ठहर ठहरके दो दो हिचकी चले, शिर कन्धाको कंपावे वह यमला हिचकी जाननी॥
क्षुद्राके लक्षण ।
प्रकृष्टकालैर्या वेगैर्मन्दैः समभिवर्त्तते ।
नाभिप्रवृत्ता या हिक्का जत्रुमूलात्प्रधावति ॥ ८ ॥
जो हिचकी बहुत देरमें कण्ठ हृदयकी सन्धिस मन्द मन्द चले उसको क्षुद्रा
नाम हिचकी कहते हैं ॥
गंभीराके लक्षण ।
नाभिप्रवृत्ता या हिक्का घोरा गम्भीरनादिनी ।
अनेकोपद्रववती गम्भीरा नाम सा स्मृता ॥ ९ ॥
जो हिचकी नाभिके पाससे उठ घोर गम्भीर शब्द करे और जिसमें प्यास ज्वरादि
अनेक उपद्रव हों उसको गम्भीरा हिचकी कहते हैं ॥
महती हिचकीके लक्षण ।
मर्माप्युत्पीडयन्तीव सततं या प्रवर्तते ।
महाहिक्केति सा ज्ञेया सर्वगात्रप्रकम्पिनी ॥ १० ॥
जो हिचकी मर्मस्थानमें पीडा करती हुई और सर्व गात्रोंको कम्पावती हुई सब
कालमें प्रवृत्त होय उसको महाहिक्का कहते हैं ॥
हिचकीके असाध्य लक्षण ।
आयम्यते हिक्कतो यस्य देहो दृष्टिश्चोर्ध्वं ताम्यते यस्य
नित्यम्। क्षीणोऽन्नद्विट् क्षौति यश्चातिमात्रं तौ द्वौ चान्त्यौ
वर्जयेद्धिक्कमानौ ॥ ११ ॥
जिसका हिचकीसे देह तन जावे, ऊंची दृष्टि हो जावे और मोह होय, क्षीण पड ,
जाय, भोजनमें अरुचि हो और छींक बहुत आवें इन दोनों हिचकियोंवाले रोगी
अर्थात् जिसको गम्भीरा और महती हिचकी होंय, सो वैद्यको त्याज्य है ॥
अतिसञ्चितदोषस्य भक्तच्छेदकृशस्य च ।
व्याधिभिः क्षीणदेहस्य वृद्धस्यातिव्यवायिनः ॥
आसां या सा समुत्पन्ना हिक्का हन्त्याशु जीवितम् ॥ १२ ॥