लघुसिद्धान्तकौमुदी (वरदराजाचार्य - भैमी एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या सहित)
Laghu Siddhanta Kaumudi of Varadaraja with Hindi Commentary
आचार्य वरदराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअथाऽव्यय-प्रकरणम्
संस्कृतसाहित्य में दो प्रकार के शब्द पाये जाते हैं। १. विकारी, २. अवि-
कारी। जो शब्द विभक्तिवचनवशात् विकार को प्राप्त होते हैं वे 'विकारी' कहाते
हैं। इस कोटि में सुंबन्त¹ और तिङन्त शब्द आते हैं। जो शब्द सदा सब विभक्तियों
में विकाररहित अर्थात् एकसमान रहते हैं वे 'अविकारी' कहाते हैं। यथा—च, न,
यदि, अपि, नाना, विना आदि । व्याकरण में अविकारी शब्दों को 'अव्यय' कहते हैं।
अब यहां उन अव्ययों का प्रकरण आरम्भ किया जाता है।
[लघु०] सञ्ज्ञा-सूत्रम्—(३६७) स्वरादिनिपातमव्ययम् । १।१।३६॥
स्वरादयो निपाताश्चाव्ययसञ्ज्ञाः स्युः ॥
अर्थः—स्वर् आदि शब्द तथा निपात अव्ययसञ्ज्ञक हों।
व्याख्या —स्वरादिनिपातम् ।१।१। अव्ययम् ।१।१। समासः—'स्वर्' शब्द
आदिर्येषान्ते स्वरादयः । स्वरादयश्च निपाताश्च = स्वरादिनिपातम् । समाहारद्वन्द्वः ।
अर्थः—(स्वरादिनिपातम्) स्वर् आदि शब्द तथा निपात (अव्ययम्) अव्ययसञ्ज्ञक
होते हैं। स्वरादि शब्द पाणिनिमुनिविरचित 'गणपाठ' में पढ़े गये हैं। निपात— अष्टा-
ध्यायी के प्रथमाध्याय के चतुर्थपादान्तर्गत प्राग्रीश्वरान्निपाताः (१.४.५६) के अधि-
कार में पढ़े गये हैं। अव्ययसञ्ज्ञा का प्रयोजन सुंल्लुक् आदि आगे मूल में ही स्पष्ट
हो जायेगा ।
अब मूलगत स्वरादिगण—अर्थ, उदाहरण तथा विस्तृत टिप्पण सहित नीचे
दिया जा रहा है। इस गण में बालोपयोगी अत्यन्त प्रसिद्ध शब्दों पर चिह्न () कर
दिया गया है।
स्वरादि-गण
[१] स्वर् ॥
स्वर्गे परे च लोके स्वः—इत्यमरः । १. स्वर्ग-लोक—पुण्यकर्माणः स्वर्गच्छन्ति ।
देवाः स्वस्तिष्ठन्ति । २. परलोक—स्वर्गतस्य क्रिया कार्या पुत्रैः परमभक्तितः (उद्धृत)।
३. सुखविशेष—यन्न दुःखेन सम्भिन्नं न च ग्रस्तमनन्तरम् । अभिलाषोपनीतं च
तत्सुखं स्वःपदास्पदम् (तन्त्रवार्त्तिक) ।
[२] अन्तर्* ॥
१. में, अन्दर, भीतर, मध्य आदि—अप्स्र्वन्तरमृतम् अप्सु भेषजम् (ऋ० १.
२३.१६), जल में अमृत है जल में औषध है। अप्रकटीकृतशक्तिः शक्तोऽपि जनस्ति-
रस्क्रियां लभते । निवसन्नन्तर्दहने लङ्घ्यो वह्निर्न तु ज्वलितः (पञ्च० १. ३२) ।
अन्तर्यश्च मुमुक्षुभिर्नियमितप्राणादिभिर्मृग्यते (विक्रमो०), निरुद्धप्राण मुमुक्षुओं से वह
१. यहां सुंवन्त से तात्पर्य अव्ययभिन्न सुंवन्तों से है।