सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
लघुसिद्धान्तकौमुदी (वरदराजाचार्य - भैमी एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या सहित)

लघुसिद्धान्तकौमुदी (वरदराजाचार्य - भैमी एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या सहित)

Laghu Siddhanta Kaumudi of Varadaraja with Hindi Commentary

आचार्य वरदराज द्वारा

DevanagariHindipublished633 पृष्ठ

पृष्ठ 48, कुल 633 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 48

संज्ञा-प्रकरणम् ३३
(७) 'इतः' पद के पीछे से प्राप्त होने पर भी तस्य लोपः सूत्र में 'तस्य' पद
के ग्रहण का क्या प्रयोजन है ?
(८) उदात्त, अनुदात्त और स्वरित में परस्पर भेद बताएं ।
(६) 'उपदेश' किसे कहते हैं ? यथाधीन स्पष्ट करें ।
(१०) अष्टाध्यायी किस ने बनाई है ? इस में कितने अध्याय और कितने
पाद हैं ? लघु-सिद्धान्त-कौमुदी के साथ अष्टाध्यायी का क्या संबन्ध है ?
(११) त्रिमुनि व्याकरणम् और उत्तरोत्तरं मुनीनां प्रामाण्यम् का भाव स्पष्ट
करें ।
(१२) लघु-सिद्धान्त-कौमुदी शब्द का अर्थ लिख कर इस के कर्त्ता के विषय
में संक्षिप्त नोट लिखें ।
(१३) 'उ' और 'ई' में, 'ऋ' और 'ऌ' में, 'ए' और 'ओ' में, 'ओ' और 'औ'
में पारस्परिक भेद बताएं ।
(१४) आभ्यन्तर और बाह्य यत्नों के भेद लिख कर उन का सार्थ विवेचन
करें ।
(१५) यदि सम्पूर्ण स्थान तुल्य होने पर ही सवर्ण-सञ्ज्ञा होती है तो क्या
'क्' और 'ङ्' की सवर्णसञ्ज्ञा नहीं होगी ?
(१६) 'ऌ' और 'ऐ' के बारह-बारह भेद सूत्रों द्वारा सिद्ध करें ।
(१७) 'संयोग' सञ्ज्ञा क्या प्रत्येक वर्ण की है या समुदाय की ? स्पष्ट करें ।
(१८) अर्ध-विसर्ग-सदृश उपध्मानीयः इस वचन का विवेचन करें ।
(१६) निम्न-लिखित सूत्रों का सूत्रस्थ पदों द्वारा अर्थ निकाल कर व्याख्यान
करें—तुल्यास्य-प्रयत्नं सवर्णम् । अणुदित्सवर्णस्य चाऽप्रत्ययः । हलोऽ-
नन्तराः संयोगः । ऊकालोऽज्झ्रस्वदीर्घप्लुतः । समाहारः स्वरितः ।
(२०) पद, संहिता, अनुनासिक और लोप सञ्ज्ञा करने वाले सूत्र सार्थ लिखें ।
(२१) इति सञ्ज्ञा-प्रकरणं समाप्तम् इस वचन की विस्तृत समालोचना करें ।
(२२) विसर्जनीय के स्थान का शास्त्रीत्या विवेचन करें ।
(२३) सूत्रों के आगे मुद्रित तीन संख्याओं का क्या तात्पर्य होता है ?
(२४) किस २ प्रत्याहार के अन्तर्गत निम्नस्थ वर्ण आते हैं ?
श्, ष्, स्; य्, व्, र्, ल्; च्, ट्, त्, क्, प्; वर्गतृतीय; वर्गपञ्चम ।
इति भैमीव्याख्योपेतायां लघु-सिद्धान्त-
कौमुद्यां सन्ध्युपयोगिसंज्ञानां
प्रायोवर्णनं समाप्तम् ॥
ल० प्र० (३)