लघुसिद्धान्तकौमुदी (वरदराजाचार्य - भैमी एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या सहित)
Laghu Siddhanta Kaumudi of Varadaraja with Hindi Commentary
आचार्य वरदराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३४८ भैमीव्याख्योपेतायां लघुसिद्धान्तकौमुद्यां
पुंवद्भाव नही होता अन्यों के मत मे हो जाता है। पुंवद्भाव मे--प्रराया, प्ररिणा
इत्यादिप्रकारेण दो २ रूप बनते हैं।
(३) नोट - 'प्ररि+आम्' यहा नुमचिर०(वा० १६) से नुँम् का बाध कर
नुट् हो जाता है। पुन नामि (१४६) मे दीर्घ तथा अट्कुप्वाङ्नुम्० (१३८) से
णत्व हो कर 'प्ररीणाम्' बनता है। ध्यान रहे कि 'प्ररि+नाम्' यहा नुट् हो चुकने
पर रायो हलि (२१५) से आत्व नही होगा, क्योकि तब सन्निपात-परिभाषा विरोध
करेगी। नामि (१४६) यह दीर्घ तो आरम्भसामर्थ्य से ही सन्निपात-परिभाषा की
सर्वथा अवहेलना किया करता है।
(यहा ऐकारान्त नपुंसक शब्दो का विवेचन समाप्त होता है।)
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अब औकारान्त 'सुनौ' शब्द का वर्णन करते है—
[लघु०] सुनु। सुनुनी। सुनूनि। सुनुना—इत्यादि ॥
व्याख्या--सु= शोभना नौर्यस्य तत् =सुनु(कुलम्)। जिस की सुन्दर नौका हो
उसे 'सुनौ' कहते हैं। नपुंसक मे एच इग्घ्रस्वादेशे(२५०) के अनुसार ह्रस्वो नपुंसके०
(२४३) से औकार को उकार ह्रस्व हो कर 'सुनु' शब्द बन जाता है। इसका उच्चा-
रण 'मधु' शब्दवत् होता है। रूपमाला यथा—
प्र० सुनु सुनुनी सुनूनि | प० सुनुन सुनुभ्याम् सुनुभ्य.
द्वि० ,, ,, ,, | ष० ,, सुनुनो सुनूनाम्
तृ० सुनुना सुनुभ्याम् सुनुभि | स० सुनुनि ,, सुनुषु
च० सुनुने ,, सुनुभ्यः | स० हेसुनो!,सुनु! हेसुनुनी! हेसुनूनि!
यहा भी पूर्ववत् श्रीमाधवे के मतानुसारोध से पुवद्भाव नही किया गया। वस्तुत.
यहा भी पुंवद्भाव हो जाता है। पुवत्वक्ष मे ह्रस्व का पुन औकार बन जाता है। तब
एचोऽयवायाव.(२२) द्वारा आव् आदेश करने से--सुनावा, सुनावे, सुनाव २, सुनावो.
२, सुनावाम्, सुनावि—ये रूप भी पक्ष मे बन जाते हैं।
(यहां औकारान्त नपुंसक शब्दों का विवेचन समाप्त होता है।)
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[लघु०] इत्यजन्ता नपुसकलिङ्गा. [शब्दा ] ॥
अर्थ.—यहा अजन्तनपुसकलिङ्ग शब्द समाप्त होते हैं।
अभ्यास (३७)
(१) न लुमताङ्गस्य सूत्र की अनित्यता कैसे और क्यो सिद्ध की जाती है ?
(२) 'वारीणाम्' मे नुट् हो वा नुँम् ? दोनो मे अन्तर स्पष्ट करें।
(३) 'प्रवृत्तिनिमित्त' किसे कहते हैं ? पीलु शब्द पर उसे घटाए ।
(४) 'प्रद्यो' शब्द नपुसक मे मापितपुस्क मानना चाहिये या नही ? सहेतुक
दोनो पक्षो का प्रतिपादन कर अपनी सम्मति लिखें।