लघुसिद्धान्तकौमुदी (वरदराजाचार्य - भैमी एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या सहित)
Laghu Siddhanta Kaumudi of Varadaraja with Hindi Commentary
आचार्य वरदराज द्वारा
पृष्ठ 164, कुल 633 में से
संदर्भ में पढ़ें+गच्छति । ८. अश्वास्+धावन्ति । ६. अपिपर्+अयम्¹ । १०.
कृष्णमेघः+तिरस्+दधे । ११. नार्थस्+ऌकारोपदेशेन² । १२.
रामस्+अब्रवीत् । १३. भगोस्+परमात्मन् । १४. पुनर्+हसति ।
१५. ह्यास्+धावन्ति ।
(३) उत्वविधि के प्रति रुत्वविधि सिद्ध है या असिद्ध ? सकारण लिखें।
(४) अर्धमात्रालाघवेन पुत्रोत्सवं मन्यन्ते वैयाकरणाः तथा पर्यायशब्दानां
लाघवगौरवचर्चा नाद्रियते इन परिभाषाओं का सोदाहरण विवेचन
करें।
———::०::———
[लघु०] विधि-सूत्रम्—(११०) रोऽसुपि ॥८।२।६९॥
अह्नो रेफादेशो न तु सुंपि । अहरहः । अहर्गणः ॥
**अर्थः—**अहन् शब्द के अन्त्य नकार के स्थान पर रेफ आदेश होता है। परन्तु
सुँप् परे होने पर नहीं होता।
**व्याख्या—**अहन् ।६।१। (अहन् सूत्र का अनुवर्त्तन होता है, यहां षष्ठी-विभक्ति
का लुक् समझना चाहिये) । रः ।१।१। रेफादकार उच्चारणार्थः । असुपि ।७।१।
अर्थः—(अहन्) अहन् शब्द के स्थान पर (रः) र् आदेश होता है (असुपि) परन्तु सुँप्
परे होने पर नहीं होता । अलोऽन्त्यपरिभाषा से अहन् के अन्त्य नकार को ही रेफ
आदेश होगा । उदाहरण यथा—
अहन्+अहन् = अहर्+अहर् = अहरहः (प्रतिदिन) । 'अहन् सुँ' इस पद को
'नित्यवीप्सयोः (८८६) से द्वित्व हो—'अहन् सुँ अहन् सुँ' बना । पुनः स्वमोर्नपुंसकात्
(२४४) से दोनों सुँप्रत्ययों का लुक् करने से—'अहन् अहन्' । अब यहां न लुमताङ्गस्य
(१६१) से प्रत्ययलक्षण के निषेध हो जाने से सुं=सुँप् के परे न होने के कारण
नकार को रेफ आदेश हो—अहरहन् । दूसरे में भी लुक् होने से असुँप् होने कारण
रोऽसुपि सूत्र से नकार को रेफ तथा अवसान में उसे विसर्ग आदेश करने पर—
'अहरहः' प्रयोग सिद्ध होता है ।
दूसरा उदाहरण—अहन्+गण = अहर्+गण = अहर्गणः (दिनों का समूह;
अह्नां गणः= अहर्गणः, षष्ठीतत्पुरुषसमासः ।) 'अहन्+आम् गण+सुँ' इस अलौकिक-
विग्रह में विभक्तियों का लुक् हो—अहन्+गण । अब यहां न लुमताङ्गस्य (१६१) से
प्रत्ययलक्षण के निषेध होने से आम् = सुँप् के परे न होने के कारण नकार को रेफ
आदेश हो—अहर्गण । विभक्ति लाने से—'अहर्गणः' प्रयोग सिद्ध होता है ।
यह सूत्र अहन् (३६३; पदान्त में अहन् के नकार को रुँ आदेश हो) सूत्र
का अपवाद है; अर्थात् उस सूत्र से रुँ प्राप्त होने पर इस सूत्र से रेफ आदेश विधान
१. पृ पालनपूरणयोः (जुहो०) इति धातोर्लङि प्रथमपुरुषैकवचनमिदम् ।
२. यहां रुँ को य् हो कर उस का वैकल्पिक लोप होगा ।