खण्डनखण्डखाद्यम् (महाकवि श्रीहर्ष - अद्वैत न्याय-खण्डन एवं तत्त्व-निर्णय सटीक)
Khandanakhandakhadya of Mahakavi Sriharsha with Commentary
महाकवि श्रीहर्ष द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपरिच्छेद ] भेद-खण्डन का अनुवाद ७१
प्रामाणिको भवितुमर्हति । तत् कस्य हेतोः ? तस्मिँस्तद्विशिष्टरूपेऽर्थे तादृशि
चोपलक्षणव्यवच्छिद्यमानात्मनि प्रमाणं निविशमानं विशेषणमपि तदीयं
तदुपलक्षणमपि वा नानुल्लिखद्भवितुं प्रभवति । तस्मिंश्च अत्यन्तमसत्येवावलम्बने
न तत्प्रामाण्यं शक्यसमर्थनम् ।
न च वाच्यं घटप्रतियोगिको पटमाश्रितोऽसौ अभावोऽभ्युपगम्यमानो
नात्यन्तासत्प्रतियोगिकतादोषमावहतीति । तथा सति संसर्गाभावादन्योन्या-
भावस्य को विशेषः स्यात् ? न हि यथा घटाभावः पटसंसर्गीति घटसंसर्गाभावं
पटे समर्थयसे, तथा घटाभावः पटात्मक इति तत्तादात्म्याभावं पटस्य
स्वीकरिष्यसि । तस्मात्तादात्म्यं संसर्गं च प्रतियोगिकोटावन्तर्भाव्य अन्योन्या-
भावसंसर्गाभावयोर्वैलक्षण्यमभ्युपेयम् । तथा सति चात्यन्तासत्प्रतियोगिता दुर्वारा ।
न्याभाव भी असत् होने से प्रमाण का विषय नहीं हो सकता । शश-विषाण से
विशिष्ट या उपलक्षित कोई वस्तु प्रमाण का विषय नहीं होती, क्योंकि शश-
विषाणविशिष्ट वस्तु में या शश-विषाणरूप उपलक्षण से व्यवच्छिद्यमान वस्तु में
प्रवृत्त प्रमाण, विशेषण या उपलक्षण को विषय किये बिना हो ही नहीं सकता ।
उस असत् विशेषण या उपलक्षणरूप विषय में ज्ञान के प्रामाण्य का समर्थन
अशक्य है ।
समर्थन—अन्योन्याभाव का घट-पटतादात्म्य प्रतियोगी नहीं है, किन्तु घटनिष्ठ
अन्योन्याभाव का प्रतियोगी पट है और पटनिष्ठ अन्योन्याभाव का प्रतियोगी घट ।
इसलिए असत्-प्रतियोगिकत्व दोष नहीं है ।
खंडन—ऐसा मानने पर संसर्गाभाव से अन्योन्याभाव में विशेषता ही क्या होगी ?
अर्थात् अन्योन्याभाव और संसर्गाभाव में स्वभावकृत तो कोई विशेष है नहीं;
प्रतियोगी तथा अनुयोगी-कृत ही विशेष है, सो आपके मत में रहा नहीं । जैसे
घट-प्रतियोगिक पटसंसर्गी घट-संसर्गाभाव है, वैसे ही घट-प्रतियोगिक पटात्मक
घटान्योन्याभाव है—यह भेद दोनों अभावों में नहीं कर सकते, क्योंकि पटात्मक
अन्योन्याभाव मानने में आपको अपसिद्धान्त हो जायगा । आप अभाव को
भावरूप नहीं मानते । अतः तादात्म्य और संसर्ग का प्रतियोगी-दल में अन्तर्भाव
करके ही अन्योन्याभाव तथा संसर्गाभाव में परस्पर विशेष स्वीकार कर सकते हैं ।
ऐसा होने पर अन्योन्याभाव का असत्-प्रतियोगित्व दुर्वार ही है ।