खण्डनखण्डखाद्यम् (महाकवि श्रीहर्ष - अद्वैत न्याय-खण्डन एवं तत्त्व-निर्णय सटीक)
Khandanakhandakhadya of Mahakavi Sriharsha with Commentary
महाकवि श्रीहर्ष द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३३८ सानुवाद खण्डनखण्डखाद्य [ प्रथम
पदविशेषणोपादानानुपादानपक्षोक्तदोषापातः, सर्वशब्दोपादाने धूमानुमानादौ
प्रसङ्गश्च ।
स्वस्वाभावविरोधशब्दार्थस्यापि एकस्यानुगतस्यासम्भवेन लक्षणाऽनुगमा-
भावो दोषः । तत्तद्भावयोर्हि विरोधः सहानवस्थानम्, अनवस्थानञ्च अवस्थान-
प्रतिषेधः । न च तद् भावस्य अभावस्वरूपादन्यत् । न चाभावस्याप्यनवस्थानं
भावस्वरूपादन्यत्, किन्तु तदेव भावस्य स्वरूपम् । तत्र स्वस्वाभावविरोधाश्रय
इत्यस्य नार्थक्यं किञ्चिन्मृग्यमाणमवाप्यते ।
स्वस्वाभावविरोधाश्रय इति वचनं विचारमर्हति । स्वस्वाभावयोर्विरोधविशे-
षणतया आधेयकोटिनिवेशात् विशेषणघटितमूर्तित्वाद्विशिष्टपदार्थस्य तदाधारत्वा-
नुपपत्तेः ।
अतिव्यापकता च स्यात् । अन्वयमादाय सपक्षे, व्यतिरेकमादाय विपक्षे,
वर्तमानस्याप्युक्तलक्षणोपेतत्वात् । स्वस्वाभावाविशेषितस्य तु विरोधाश्रयेऽभि-
धीयमाने सर्वानुमानव्यापकत्वमनैकान्तिकलक्षणस्याऽऽपतेत् ।
आश्रय का आश्रय होने से 'पर्वतो वह्निमान् धूमात्' इस सत्-हेतु में अतिव्याप्ति हो
जायगी ।
किञ्च—'स्वस्वाभाव-विरोध' शब्द का एक अनुगत अर्थ न हो सकने से लक्षण
का अननुगम हो जायगा । देखिये—प्रतियोगी और अभाव का विरोध सह-अनवस्थान
ही है और यह अनवस्थान अवस्थान का प्रतिषेधरूप है । वह भाव का अनवस्थान
अभावरूप से अन्य नहीं है, किन्तु अभावस्वरूप ही है और अभाव का अनवस्थान
भावस्वरूप से अन्य नहीं है, किन्तु भावस्वरूप ही है । अतः खोजने पर भी 'स्वस्वाभाव-
विरोधाश्रय' शब्द का एक अर्थ प्राप्त नहीं होता ।
किञ्च—'स्वस्वाभाव-विरोधाश्रय' यह वचन भी विचारणीय है । स्वस्वाभाव विरोध
में विशेषण होने से उसका आधेयकोटि में निवेश है । विशिष्ट पदार्थ विशेषण से
घटितमूर्तिक होता है और स्वस्वाभावविशिष्ट विरोध का आश्रय स्वस्वाभाव नहीं हो
सकता, कारण अंशतः आत्माश्रय होने से स्व का स्व आश्रय नहीं होता ।
किञ्च—सद्धेतुमात्र में अतिव्याप्ति हो जायगी. कारण वहाँ भी स्व ( हेतु ) से
आश्रित सपक्ष और स्वाभाव से आश्रित विपक्ष हैं । यदि स्वस्वाभाव से अविशेषित
विरोधाश्रयाश्रित सपक्ष-विपक्षत्व का अभिधान करें तो, सम्पूर्ण अनुमानों में अतिव्याप्ति हो
जायगी, कारण हेतुमात्र में अभेद के विरोध के आश्रय-भेद से आश्रित सपक्ष-
विपक्षत्व हैं ।