खण्डनखण्डखाद्यम् (महाकवि श्रीहर्ष - अद्वैत न्याय-खण्डन एवं तत्त्व-निर्णय सटीक)
Khandanakhandakhadya of Mahakavi Sriharsha with Commentary
महाकवि श्रीहर्ष द्वारा
पृष्ठ 294, कुल 610 में से
संदर्भ में पढ़ेंपरिच्छेद ] उपाधि-लक्षण का खण्डने ३७७
न च साधनाव्यापकत्वं सर्वत्र निश्चेतुं शक्यम्, 'स श्यामो मैत्रतनयत्वा-
दि'त्यत्र शाकाद्याहारपरिणतिपरम्पराया मैत्रतनयेऽभावस्य दुरधिगमत्वात् ।
यत्रोक्तलक्षणस्य निश्चायकं प्रमाणमस्ति तत्र निश्चितोपाधित्वम् ; अन्यत्र
शङ्कितोपाधित्वम् । मैत्रतनयत्वव्याप्यशाकाद्याहारपरिणतिपरम्परया स्थातव्य-
मित्यत्र नियामकाभावादिति चेन्न । मैत्रतनयत्वेनैव हेतुना तस्यापि प्रसाधने तच्छ-
ङ्काया अपि छेत्तुमशक्यत्वात् ।
तत्रापि तत्तत्सामग्रीत्युपाधिपरम्पराभिधाने च तस्या अपि मैत्रतनयत्वेनैव
प्रसाधनस्य कर्तुं शक्यत्वात् ।
किञ्च—इसी तरह उपाधिलक्षणघटक साधनाव्यापकत्व का भी सर्वत्र निश्चय
नहीं हो सकता । कारण 'स श्यामः मैत्रतनयत्वात्' इस स्थल में शाकाद्याहार-परिणति-
परम्परारूप उपाधि के अभाव का ज्ञान मैत्रतनय में हो नहीं सकता ।
समर्थन—जिस उपाधि के साध्यव्यापकत्व और साधनाव्यापकत्व में प्रमाण हो, वह
निश्चित उपाधि है और जिस उपाधि के उक्त उभय रूपों में प्रमाण न हो, उसे हम
शङ्कित उपाधि ही मानेंगे । शाकाद्याहारपरिणतिपरम्परा मैत्रतनयत्व की व्याप्य है, इसमें
कोई नियामक नहीं है । अर्थात् गौर मैत्रतनय में शाकाद्याहार-परिणतिपरम्परा नहीं है,
अतः यह शङ्कित उपाधि ही है । खण्डन—'मैत्रतनयः शाकाद्याहार-परिणतिपरम्परावान्
मैत्रतनयत्वात्' इस प्रकार मैत्रतनयत्वरूप हेतु से ही मैत्रतनय में शाकाद्याहार-परिणतिपर-
म्परारूप उपाधि की अनुमिति होने से साधनाव्यापकत्व की शंका का उच्छेद हो
सकता है ।
समर्थन—मैत्रतनयत्व से शाकाद्याहार-परिणतिपरम्परा के साधन में शाकाद्याहार-
सामग्रीसत्त्व उपाधि है। अतः उक्त अनुमिति न होने से 'स श्यामः मैत्रतनयत्वात्' इस
स्थल में शाकपाकजत्व शंकित उपाधि हो सकती है। खण्डन—शाकाद्याहारसामग्री की
भी मैत्रतनयत्व से ही अनुमिति होने के कारण वह साधन की अव्यापक न होने से
उपाधि नहीं है। यदि शाकाद्याहारसामग्री की अनुमिति में भी शाकाद्याहारसामग्री की
सामग्री को उपाधि कहें, तो मैत्रतनयत्व से शाकाद्याहारसामग्री की सामग्री का अनुमान
होने से वह भी साधनाव्यापक न होने के कारण उपाधि न कहलायेगी । इसी तरह
तत्सामग्री के उपाधित्व के उपन्यास में भी मैत्रतनयत्व द्वारा तत्सामग्री के अनुमान से
साधनाव्यापकत्व जानना चाहिए ।