खण्डनखण्डखाद्यम् (महाकवि श्रीहर्ष - अद्वैत न्याय-खण्डन एवं तत्त्व-निर्णय सटीक)
Khandanakhandakhadya of Mahakavi Sriharsha with Commentary
महाकवि श्रीहर्ष द्वारा
पृष्ठ 142, कुल 610 में से
संदर्भ में पढ़ेंपरिच्छेद ] भेद-संसर्गाभाव का भेद-खण्डन १२५
स्मृति-स्मृतित्वयोरन्योन्याभावाभावश्च अन्योन्यात्माऽनुभूतावपि तुल्यः । न
हि स्मृतित्वान्योन्याभावोऽनुभूतिरित्युक्तमावर्तते ।
भेद-संसर्गाभावयोर्भेदखण्डनम्
अथ मा भूद्भेदाभेदमादाय परिहारः ; तथापि 'इदं तन्न भवति, इह तन्नास्ती'ति
प्रतीतिसाक्षिक एवान्योन्याभावसंसर्गाभावयोर्भेद इति चेन्न । प्रतियोगिरूपोपाध्य-
प्रतियोगित्व का ही निषेध हुआ, उक्त प्रमा का निषेध तो हुआ नहीं— अनादि उक्त
प्रमा ही सिद्ध हुई । अतः उक्त प्रमा के करणरूप प्रमाण से ही अनुभूति में स्मृतित्व
सिद्ध हो जायगा ।
किंच—जैसे स्मृति में स्मृतित्व के अन्योन्याभाव का अभाव ( अन्योन्याभाव )
है और वह अन्योन्यरूप है, वैसे ही अनुभूति में भी स्मृतित्व के अन्योन्याभाव का
अभाव ( अन्योन्याभाव ) है और वह अन्योन्यरूप है । अर्थात् अनुभूति और स्मृतित्व
उभयरूप है । फिर स्मृतित्व का भेदाभेद स्मृति के तुल्य अनुभूति में क्यों न
माना जाय ?
समर्थन—स्मृतित्व के अन्योन्याभाव का अत्यन्ताभाव स्मृति में ही है, अनुभूति में
नहीं, क्योंकि धर्म का धर्मी में अभेद होने से अन्योन्याभाव नहीं है । फिर, अन्योन्याभाव
का अत्यन्ताभाव भेदाभेद का प्रयोजक है, अतः स्मृतित्व का भेदाभेद अनुभूति में नहीं
है । खंडन—जैसे स्मृतित्वात्यन्ताभाव को अन्योन्याभाव मानकर प्रथम स्मृति में अति-
व्याप्ति हम दे आये हैं, वैसे ही अब भी स्मृति के अन्योन्याभाव के अत्यन्ताभाव को
अन्योन्याभाव मानकर अनुभूति में स्मृतित्व का आपादन ( ग्रहण ) कर सकते हैं;
क्योंकि अबतक अत्यन्ताभाव और अन्योन्याभाव में परस्पर भेद सिद्ध ही नहीं हुआ है।
भेद-संसर्गाभाव का भेद-खण्डन
समर्थन—यद्यपि उक्त युक्तियों से स्मृतित्व का भेदाभेद अनुभूति में भी हो
सकता है । अतः आप यह तो कह नहीं सकते कि 'जिसका जिसमें भेदाभेद है, उसका
उसमें अन्योन्याभाव नहीं रहता।' कारण यदि यह कहें, तो अनुभूति में भी स्मृतित्व का
भेदाभेद होने से अन्योन्याभाव का प्रतिपादन नहीं कर सकेंगे । फिर भी 'स्मृतित्व का
अन्योन्याभाव भी स्मृतित्वाभाव है और वह स्मृति में है, अतः प्रमा-लक्षण की
स्मृति में अतिव्याप्ति है' यह नहीं कह सकते; क्योंकि उस ( प्रमा-लक्षण ) में