काव्यप्रकाश (आचार्य मम्मट - सम्पूर्ण १० उल्लास सटीक)
Kavyaprakasha of Mammata with Hindi Commentary
आचार्य मम्मट / पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंAPPENDIX B XXVII
४५३ देवीभावं गमिता .वा० का० अ० सू० वृ०, IV. 2. 4; ह०
र० आ०; श्री० का० प० 250; गो०
का० प्र० P. 343.
२०८ देशः सोऽयमरातिशोणित भ० वे० सं०, III. 33; म० व्य० वि०;
गो० का० प्र० P. 205.
२६ दैवादहमद्य तया रु० का० अ० VII. 29; गो० का० प्र०
P. 64.
४३७ दोभ्यां तितीर्षति तरङ्ग श्री० का० प० 241; गो० का० प्र० P.336.
१८६ द्वयं गतं संप्रति का० कु० सं० V. 71; कु० व० जी० I.
23; म०व्य० वि०, P. 40; श्री० का०
प० 117; गो० का० प्र० P. 230.
२५२ द्वयं गतं संप्रति " " " "
२२ द्वारोपान्तनिरन्तरे गो० का० प्र० P. 54; सुरभा 304/6.
३९७ धन्यस्यानन्यसामान्य गो० का० प्र० P. 313.
६१ धन्यासि या कथयसि शा० प०; विज्जिका; श्री० का० प०
42; गो० का० प्र० P. 102.
१८२ धम्मिल्लस्य न कस्य वा० का० अ० सू० वृ० II. 1.22; श्री०
का० प०95; गो० का० प्र० P. 192.
५६४ धवलोसि जह वि हा० गा० स० 665,VII. 64; रु० अ०
स० P. 96; गो० का० प्र० P. 383.
५३५ धातुः शिल्पातिशय गो० का० प्र० P. 376.
२१० धीरो विनीतो निपुणो गो० का० प्र० P. 206.
४१४ न केवलं भाति नितान्त गो० का० प्र० P. 322.
९४ न चेह जीवितः कश्चित् श्री० का०प० 52; गो० का० प्र० P. 121.
५४९ न तज्जलं यन्न सुचारु भ० का०, II. 19; श्री० का० प० 309;
गो० का० प्र० P. 381.
१६७ न त्रस्तं यदि नाम भ० म० वी० च० II. 28; गो० का०
प्र० P. 185.
५१३ नन्वाश्रयस्थितिरियं भ० श० 4; रु० अ० स० P. 85; गो०
का० प्र० P. 366.
५७४ नयनानन्ददायीन्दोः क्षे० औ० वि० च०, P. 46; श्री० का०
प० 320; गो० का० प्र० P. 392.