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सर्वकोश
काव्यप्रकाश (आचार्य मम्मट - सम्पूर्ण १० उल्लास सटीक)

काव्यप्रकाश (आचार्य मम्मट - सम्पूर्ण १० उल्लास सटीक)

Kavyaprakasha of Mammata with Hindi Commentary

आचार्य मम्मट / पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि द्वारा

DevanagariSanskritpublished616 पृष्ठ

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पृष्ठ 579

XXII KĀVYAPRAKĀŚA
३९३ चकितहरिणलोललोचनायाः श्री० का० प० 211; गो० का० प्र०
P. 311.
५८० चक्री चक्रारपंक्ति म० सू० श० 71; गो० का० प्र० P. 395;
सु० र० भा० 27/14.
५८४ चण्डालैरिव युष्माभिः वा० का० अ० सू० वृ०, IV. 2.9.
१३१ चत्वारो वयमृत्विजः भ० वे० सं०, I. 25; गो० का० प्र०
P. 220.
२९४ चन्द्रं गता पद्मगुणान्न का० कु० स० I. 43; म० व्य० वि० ?;
गो० का० प्र० P. 252.
२९३ चरणत्रपरित्राण गो० का० प्र० P. 251.
२०१ चापाचार्यस्त्रिपुर रा० बा० रा० II. 37, P. 42; कु० व०
जी० I. 66; म० व्य० वि० P. 234;
गो० का० प्र० PP. 202, 296.
२३० चापाचार्यस्त्रिपुर रा० बा० रा० II. 37, P. 42; कु० व०
जी० I. 66; म० व्य. वि० P. 234;
गो० का० प्र० PP. 202, 296.
३४३ चित्ते विहट्टि ण तुट्टदि रा० क० म० II 4; श्री० का० प० 175;
गो० का० प्र० P. 276.
५३६ चित्रं चित्रं बत बत रु० अ० स० P. 77; गो० का० प्र०
P. 377.
४३ चित्रं महानेष बतावतारः श्री० का० प० 29; गो; का० प्र० P. 84.
८१ चिन्तयन्ती जगत्सूर्तिं वि० पु० V. 13-21, 22; गो० का०
प्र० P. 114.
५९० चिन्तारत्नमिव च्युतोऽसि न० सा० टीका on रु० का० अ० XI. 20.
१६६ चिरकालपरिप्राप्त गो० का० प्र० P. 184.
२५७ जगति जयिनस्ते ते भ० मा० मा० I. 36; श्री० का० प०
128; गो० का० प्र० P. 235.
२९२ जगाद मधुरां वाचं वा० का० अ० सू० वृ० II. 2.18.
१५० जंघाकाण्डोरुनालोनल म० व्य० वि० P. 385; श्री० का० प०
125; गो० का० प्र० PP. 176, 220.
२३२ जंघाकाण्डोरुनालोनल म० व्य० वि० P. 385; श्री० का० प०
125; गो० का० प्र० PP. 176, 220.