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सर्वकोश
काव्यप्रकाश (आचार्य मम्मट - सम्पूर्ण १० उल्लास सटीक)

काव्यप्रकाश (आचार्य मम्मट - सम्पूर्ण १० उल्लास सटीक)

Kavyaprakasha of Mammata with Hindi Commentary

आचार्य मम्मट / पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि द्वारा

DevanagariSanskritpublished616 पृष्ठ

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पृष्ठ 568

APPENDIX B XI
P. 209; सु० र० भा० 252/50.
५११ अयमेकपदे तया वियोगः का० वि० उ० IV. 10; अ० ध्व०
आ० P. 156; कु० व० जी० II.
109; श्री० का० प० 101; गो०
का० प्र० P. 365.
५८६ अयं पद्मासनासीनः भा० का० II. 25; वा० का० अ०
सू० वृ० IV. 2. 11; भो० स० क० आ०
I. 61; श्री० का० प० 329; गो० का०
प्र० P. 397.
४१८ अयं मार्तण्डः किं स खलु रु० अ० स० P. 30; गो० का० प्र०
P. 325.
४९० अयं वारामेको निलय भ० श० 108; रु० अ० स० P. 72;
गो० का० प्र० P. 356; सु० र० भा०
216/33.
११६ अयं स रशनोत्कर्षी म० भा०, स्त्री०, Ch. 24. Sl. 19;
गो० का० प्र० PP. 135, 271.
३३६ अयं स रशनोत्कर्षी ” ” ” ”
३७३ अयं सर्वाणि शास्त्राणि गो० का० प्र० P. 296.
४०८ अरातिविक्रमालोक गो० का० प्र० P. 317.
३८९ अरिवधदेहशरीरः उ० का० अ० सा० सं० I; गो० का० प्र०
P. 306.
४९६ अरुर्चिनिशया विना गो० का० प्र० P. 358; सु० र० भा०
175/931.
२८३ अरे रामाहस्ताभरण का० वि० उ० ?; श्री० का० प० 143;
गो० का० प्र० P. 248.
२७७ अर्थित्वे प्रकटीकृतेऽपि म० वी० च० II. 9; श्री० का० प०
138; गो० का० प्र० P. 244.
३६९ अलङ्कारः शङ्काकर सु० र० को० No. 1344; गो० का०
प्र० P. 295; सु० र० भा० 93/94;
धर्मकीर्तिः; कवस; बिका 58.