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सर्वकोश
काव्यादर्श (महाकवि दण्डी - प्रसादिनी सान्वय हिन्दी व्याख्या सहित)

काव्यादर्श (महाकवि दण्डी - प्रसादिनी सान्वय हिन्दी व्याख्या सहित)

Kavyadarsha of Mahakavi Dandin with Prasadini Commentary

महाकवि दण्डी द्वारा

DevanagariHindipublished270 पृष्ठ

पृष्ठ 97, कुल 270 में से

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पृष्ठ 97

७४ काव्यादर्श [३।६१-६२
बिभर्ति भूमेर्वलयं भुजेन ते भुजङ्गमोऽमा स्मरतो मदञ्चितम् ।
शृणूक्तमेकं स्वमवेत्य भूधरं भुजङ्गमो मा स्म रतो मदञ्चितम् ॥ ६१ ॥
स्मरानलो मान-विवर्धितो यः, स निर्वृतिं ते किमपाकरोति ?
समन्ततस्तामरसेक्षणे न समन्ततस्तामरसे क्षणेन ॥ ६२ ॥
५ सर्प (शेषनाग) तुम्हारी भुजाके साथ (मिलकर) भूगोलको धारण
करता है । (इस बातको) स्मरण करते हुए मुझसे एक अच्छी बात सुनो—
एक (अकेली) अपनी भुजाको पृथिवीका धारक समझकर प्रसन्न हुए तुम
प्रभूत गर्व मत करना ॥ ६१ ॥
६ हे अपनेको म्लान करनेपर तुली हुई, कमलसदृश लोचनों वाली,
तुम्हारा कामाग्नि (कामपीडा) मान करनेसे बढ़ गया है । सब तरफसे समान
रूपसे (एक साथ) फैला हुआ वह क्षण भरमें तुम्हारे धैर्य (सुस्थिति) को क्यों
नहीं दूर कर रहा है ? अर्थात् इस अवस्थाको प्राप्त करके भी तुम मान क्यों
नहीं छोड़ रही ? ॥ ६२ ॥
५ (३. i. ख. २) व्यवहित द्वितीयपादाभ्यास यमक—इस श्लोकमें कविने
किसी राजाकी प्रशंसा व्याजस्तुतिसे की है । यहाँ द्वितीयपादकी आवृत्ति
तृतीय पादके व्यवधानसे चौथे पादमें की गई है । रुद्रटने इसे 'सन्दष्टक' नाम
दिया है । माघने इस यमकका प्रयोग बहुत किया है ॥ ६१ ॥
६ (३. i. ग) तृतीयपादाभ्यास अव्यपेत यमक—प्रियतमके किसी
अपराधपर अत्यन्त तनी हुई मानवती नायिकाके प्रति उसके प्रति हितैषी
किसीका कथन उपेन्द्रवज्रा छन्दमें निबद्ध प्रकृत श्लोकमें कविने दिया है ।
रमणी अत्यन्त सुन्दर है । उसके नयन तामरस (तामरस = जल में रहने से
कमल) के समान झूमने वाले हैं । अथवा ताम = चाहतके रससे सराबोर,
प्रेमाल है । अथवा प्रियविरहके कारण उनका रस = पानी ताम = म्लान हो
गया है, रोते-रोते सूख गया है । वह स्वयं भी तामरसा है : कमलका फूल है,
उस जैसी कोमल तथा सुन्दर है । पर अब वह ताम = म्लानतामें रस अनुभव
१. अन्वयः—भुजङ्गमः ते भुजेन अमा भूमेर्वलयं बिभर्ति । स्मरतः मत्
अञ्चितमेकमुक्तं शृणु । स्वं भुजं भूधरम् अवेत्य रतः चितं मदं मा
स्म गमः ।
२. अन्वयः—तामरसे, तामरसेक्षणे, यः स्मरानलः, मान-विवर्धितः समन्ततः
समं ततः, स क्षणेन ते निर्वृतिं किं न अपाकरोति ?