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सर्वकोश
काव्यादर्श (महाकवि दण्डी - प्रसादिनी सान्वय हिन्दी व्याख्या सहित)

काव्यादर्श (महाकवि दण्डी - प्रसादिनी सान्वय हिन्दी व्याख्या सहित)

Kavyadarsha of Mahakavi Dandin with Prasadini Commentary

महाकवि दण्डी द्वारा

DevanagariHindipublished270 पृष्ठ

पृष्ठ 53, कुल 270 में से

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पृष्ठ 53

३० काव्यादर्श [३।१८-१६
(१. १ अव्यपेत पादादि घ. चतुष्पाद यमक)
१५. रमणी रमणीया मे पाटला पाटलांशुका ।
वारुणीवारुणीभूत-सौरभा सौरभास्पदम् १ ॥ १८ ॥
इति पादादियमकमव्यपेतं विकल्पितम् ।
(१. २ व्यपेत पादादि यमक)
व्यपेतस्यापि वर्ण्यन्ते विकल्पास्तस्य केचन ॥ १६ ॥
१५. गुलाबी रेशमी वस्त्रोंवाली, महकता गुलाबका फूल, पश्चिम दिशा-
सदृश अरुणवर्ण सूर्यकी कान्तिवाली सुन्दरी मेरे रमणके योग्य है ॥ १८ ॥
इस प्रकार यहाँ पादोंके आदिमें प्रयुक्त अव्यपेत (अन्तररहित) यमकके
भेद बताये गये । अब उस (पादादियमक) के व्यवधानमें प्रयुक्तके भी कुछ
भेदोंका वर्णन किया जा रहा है ॥ १६ ॥
अकथम्—अविद्यमाना कथा वचनं यस्य, तत् (बहुव्रीहि) । तुम्हारे मुख
के आगे कोई कमलकी बात भी नहीं पूछता है, भले ही वह कितना भी
पानीको शोभायुक्त करे, या भ्रमर उसपर मँडरायें, या वह सुन्दर पँखुड़ियोंसे
युक्त हो । यह आशय भी 'अकथम्'का हो सकता है ॥ १७ ॥
१५. (१. घ.) अव्यपेत सुकर चतुष्पादादियमक—आदियमकके पन्द्रहवें
भेदके इस उदाहरणमें नायककी रतिकी आलम्बन नायिकाके सौन्दर्यका
वर्णन किया गया है । नायिकापर गुलाबके फूल के धर्मसहित आरोपसे
रूपक तथा वारुणीसे सादृश्य बतानेसे उपमा अर्थालङ्कार हैं । चारों पादोंके
आदिमें एकैक वर्णसमुदायकी निरन्तर आवृत्तिसे यहाँ अव्यपेत चतुष्पादादि-
यमक है । वह असंयुक्त एवं कोमल वर्णोंसे घटित होनेसे वर्ण्य वस्तुके सर्वथा
अनुकूल है । क्लिष्ट कल्पनासे रहित है । अतः मधुर है ॥ १८ ॥
इस प्रकार १५ उदाहरणोंमें सुकर अव्यपेत आदियमकके १५ भेदोंके
उदाहरण देनेके बाद आचार्यने व्यपेत आदियमकके पन्द्रह भेदोंमेंसे कुछके
वर्णनकी प्रतिज्ञा इस (१६वें) श्लोकके उत्तरार्धमें की है ।
व्यपेत यमकके भी अव्यपेतके समान १५ भेद होते हैं । दिग्दर्शनार्थ उनमें
से १३ भेदोंके उदाहरण दिये हैं । इनमें (क) एकपाद यमकके चार तथा (ग)
त्रिपादका एक भेद नहीं हैं । (ख)द्विपादके सब (छह)तथा (ग) त्रिपादयमकके
१. अन्वयः—पाटलांशुका, सौरभास्पदपाटला, वारुणीव अरुणीभूत-सौरभा
रमणी मे रमणीया ।
२. पाटला पाटली स्त्री स्यादस्याः पुष्पे पुनर्न ना ।