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कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा

DevanagariSanskritpublished918 पृष्ठ

पृष्ठ 474, कुल 918 में से

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पृष्ठ 474
३९०कौटिल्य का अर्थशास्त्र[ चौथा अधिकरण

(१) यश्चैनान् दहेदपनयेद्वा स तमेव दण्डं लभेत, साहसमुत्तमं वा।
(२) हिंस्रस्तेनानां भक्तवासोपकरणाग्निमंत्रदानवैयावृत्यकर्मसूत्तमो दण्डः। परिभाषणमविज्ञाने। हिंस्रस्तेनानां पुत्रदारमसमंत्रं विसृजेत्, समंत्रमाददीत।
(३) राज्यकामुकमन्तःपुरप्रधर्षकमटव्यमित्रोत्साहकं दुर्गराष्ट्रदण्डकोपकं वा शिरोहस्तप्रादीपकं घातयेत्।
(४) ब्राह्मणं तमः प्रवेशयेत्।
(५) मातृपितृपुत्रभ्रात्राचार्यतपस्विघातकं वात्वक्छिरःप्रादीपकं घातयेत्। तेषामाक्रोशे जिह्वाच्छेदः। अङ्गाभिरदने तदङ्गान्मोच्यः।


कान काट ले, धमकी देकर हत्या, चोरी की घोषणा करने वाला, बलात्कार से नगर तथा गाँवों का धन ले जाने वाला; भीत तोडकर सेंध लगाने वाला, रास्ते की धर्म-शालाओं तथा प्याउओं की चोरी करने वाला और राजा के हाथी; घोड़े तथा रथों को नष्ट करने, मारने या चुराने वाला, इन सभी प्रकार के अपराधियों को शूली पर लटका दिया जाय।

(१) इन लोगों को जो दाह-संस्कार या क्रिया-कर्म करे या उनको उठा कर गंगा-प्रवाह आदि के लिए ले जाय उसको भी शूली पर चढ़ाया जाय या उत्तम साहस दण्ड दिया जाय।

(२) जो लोग हत्यारों को खाना, रहना, वस्त्र, आग और सलाह दें तथा उनके यहाँ नौकरी करें उन्हें भी उत्तम साहस दण्ड दिया जाय। जिन्हें यह पता नहीं है कि वे हत्यारे या चोर हैं, उन्हें वाक् ताड़ना दी जाय। हत्यारों और चोरों के स्त्री-पुत्र यदि हत्या-चोरी में शामिल न हों तो उन्हें छोड़ दिया जाय, यदि उन्होंने भी किसी प्रकार की सहायता की हो तो उन्हें गिरफ्तार कर यथोचित दण्ड दिया जाय।

(३) राजसिंहासन को हथियाने की इच्छा रखने वाले, अंतःपुर में व्यर्थ का झमेला खड़ा कर देने वाले, आटवी एवं पुलिंद आदि शत्रु राजाओं को उभाड़ने वाले, किले की सेना तथा बाहर की सेना में बगावत फैला देने वाले, पुरुषों के सिर और हाथ में आग लगाकर उनको कत्ल किया जाय।

(४) यदि ऐसा दुष्कर्म करने वाला कोई ब्राह्मण हो तो उसे आजीवन के लिए काल-कोठरी में बंद कर दिया जाय।

(५) जो व्यक्ति माता, पिता, पुत्र, भाई, आचार्य और तपस्वी की हत्या कर डाले, उसके शिर की खाल उतरवा कर उसमें आग लगायी जाय और तब उसको कत्ल कराया जाय। माता-पिता को गाली देने वाले की जीभ कटवा दी जाय। माता-पिता के किसी अंग को कोई जिस अंग से नोचे-खसोटे उसका वही अंग कटवा दिया जाय।