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सर्वकोश
कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा

DevanagariSanskritpublished918 पृष्ठ

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पृष्ठ 431

प्र० ७६ : अ० १ ] शिल्पियों सम्बन्धी नियम ३४७

(१) मुकुलावदातं शिलापट्टशुद्धं धौतसूत्रवर्णं प्रमृष्टश्वेतं चैकरात्रोत्तरं दद्युः ।
(२) पञ्चरात्रिकं तनुरागं, षड्रात्रिकं नीलं, पुष्पलाक्षामञ्जिष्ठारक्तं, गुरुपरिकर्म यत्नोपचार्यं जात्यं वासः सप्तरात्रिकम् । ततः परं वेतनहानिं प्राप्नुयुः ।
(३) श्रद्धेया रागविवादेषु वेतनं कुशलाः कल्पयेयुः ।
(४) पराध्यानां पणो वेतनं मध्यमानामर्धपणः, प्रत्यवराणां पादः ।
(५) स्थूलकानां माषद्विमाषकं द्विगुणं रक्तकानाम् । प्रथमनेजने चतुर्भागः क्षयः । द्वितीये पञ्चभागः । तेनोत्तरं व्याख्यातम् ।
(६) रजकैस्तुन्नवाया व्याख्याताः ।
(७) सुवर्णकाराणामशुचिहस्ताद्रूप्यं सुवर्णमनाख्याय सरूपं क्रीणतां


धोबी धुलाई के कपड़ों को बेचे, किराये पर दे या गिरवी रखे उस पर बारह पण दण्ड किया जाय । कपड़ा बदल जाने पर वह कपड़े के मूल्य का दुगुना दण्ड और कपड़ा भी वापस दे ।

( १ ) धोबी को चाहिए कि वह अधखिली पुष्पकली के समान स्वच्छ-श्वेत कपड़े को धोकर एक दिन में ही वापस करे, शिलापट्ट के समान स्वच्छ कपड़े को दो दिन में, धुले हुए सूत की तरह श्वेत कपड़े को तीन दिन में और अत्यंत श्वेत कपड़े को चार दिन में धोकर वापस करे ।

( २ ) इसी प्रकार हलके रंग वाले कपड़े को पांच दिन में, नीले, गाढ़े रंग के, हरसिंगार, लाख तथा मजीठ आदि में रंगे कपड़े को छह दिन में, रेशम, पशम, वेल-बूटेदार जैसे कठिनाई से धुले जाने योग्य उत्तम कपड़ों को सात दिन में धोकर वापस करे । इसके बाद वापस करने पर उसकी धुलाई न दी जाय ।

( ३ ) यदि रंगीन कपड़ों की धुलाई देने में झगड़ा हो जाय तो उसका फैसला रंगों को ठीक-ठीक समझने वाले कुशल व्यक्ति करें ।

( ४ ) बढ़िया रंगीन कपड़ों की धुलाई एक पण, मध्यम दर्जे के रंगीन कपड़ों की धुलाई आधा पण और मामूली रंगीन कपड़ों की धुलाई चौथाई पण दी जानी चाहिए ।

( ५ ) इसी प्रकार मोटे कपड़ों की धुलाई एक या दो माष और रंगे हुए कपड़ों की धुलाई इससे दुगुनी देनी चाहिए । कपड़े की पहिली धुलाई में उसकी चौथाई कीमत कम हो जाती है । दूसरी धुलाई में शेष मूल्य का पांचवां हिस्सा कम हो जाता है; और तीसरी धुलाई में उस शेष मूल्य का छठा हिस्सा कम हो जाता है ।

( ६ ) धोबियों के समान दर्जियों (तुन्नवाय) के नियम भी समझ लेना चाहिए ।

( ७ ) सुनार : यदि सुनार निम्नकोटि के नौकर-चाकरों (अशुचिहस्त) के हाथ